प्राकृतिक जीवन शैली, यम नियमों का पालन और नित्य
सात्विक, संतुलित एवं ऋतु के अनुकूल आहार विहार करने से मन शुभ और
कल्याणकारी संकल्प वाला होता है।
शहीद उद्यान स्थित कायकाल्प केंद्र
में हुई गोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए नेचरोपैथ डा. राजेश मिश्र ने
कहा कि शुभ संकल्प वाले मन का रास्ता रसोई से होकर जाता है। मन को सत्व,
रजस तथा तमोमय का गया है। कहा कि मन जाग्रत और स्वपभनावस्था में, अंधकार और
प्रकाश में अपने विषय को ग्रहण कर लेता है।
अत: सत्व की वृद्धि के लिए
प्राकृतिक जीवन, यम नियमों का पालन और रसोई को ठीक कराना होगा। उन्होंने
कहा कि मन वह है जिसके द्वारा मनन किया जाए। डा. मिश्र ने सत्व गुण की
वृद्धि के लिए चौका क्रांति लाने पर बल दिया। दीप्ति सोनी ने कहा कि वह दिन
में ही कायाकल्प केंद्र आकर लाभान्वित हुई।
कामनी श्रीवास्तव ने कहा कि
उचित आहार और उपचार से कोई भी लाभान्वित हो सकता है। सीमा मिश्र ने कहा कि
महिलाओं को वैज्ञानिक ढंग से भोजन तैयार करना चाहिए और फ्रिज में रखी
चीजों के सेवन से बचना चाहिए। डा. सावित्री शुक्ला ने कहा कि भोजन को
वैज्ञानिक ढंग से तैयार करने के साथ प्राकृतिक ढंग से कृषि कार्य भी करना
होगा, तभी व्यक्ति तन मन से स्वस्थ रहेगा।
डा. शीला पांडे ने कहा कि
सात्विक आहार से मन ऊर्ध्वमुखी होगा, जिससे राम, कृष्ण, गौतम जैसी संतानें
जन्म लेगी। इस मौके पर डा. बीएस पांडे, डा. दिनेश शंकर दबे, आचार्य रमेश
चंद्र शुक्ल, राम प्रकाश राठौर, शिव बालक, सुनीता आदि मौजूद थे।