फोटो-03- दुलीचंद चौराहा पर होलिका का पूजन करतीं महिलाएं। संवाद
फोटो-04- होलिका का पूजन करने के बाद परिवार के सदस्यों को टीका करतीं महिलाएं। संवाद
- मोहल्ले की महिलाएं आज भी जीवित होलिका माता के रूप में होली की करतीं हैं पूजा-अर्चना
- हरियाणा प्रांत के नारनौल के रहने वाले थे बाबा चंद्रसेन, उत्तराधिकारी यहीं के होकर रह गए
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। प्रेम और भाईचारे की संस्कृति के होली त्योहार पर आज रंग खेला जाएगा। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में होलिका दहन होगा। होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद की जीवित बचने और उनकी बुआ के आग में जल जाने के समय से जोड़ी जाती है।
शहर में रेलवेगंज में दुलीचंद चौराहा पर अंग्रेजी हुकूमत में 172 साल पहले बाबा चंद्रसेन ने होली रखी थी, यह परंपरा आज भी कायम है। मोहल्ला की महिलाएं जीवित होलिका माता के रूप में होली की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवारीजनों की लंबी आयु की कामना करती हैं।
अंग्रेजी शासनकाल में हरियाणा से बिहार प्रांत जा रहे बाबा चंद्रसेन ने हरदोई में प्रवास किया। यहां की आबोहवा रास आई और यहीं के होकर रह गए। अंग्रेजी शासनकाल में उन्होंने हिंदू एकजुटता के उद्देश्य से दुलीचंद चौराहा पर पौराणिक होलिका दहन परंपरा को शुरू किया। अंग्रेजों ने विरोध किया तो उन्होंने कोलकाता तक अधिकारियों को समझाबुझा लिया था।
बाबा चंद्रसेन परिवार के वरिष्ठ सदस्य गौरीशंकर अग्रवाल और सोमेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस साल 172वां होलिकोत्सव मनाया जा रहा है। बताया कि मारवाड़ी समाज की महिलाएं उपवास रखकर विधि-विधान से गोबर के उपले और कच्चे सूत से होली का पूजन कर भोग लगाती हैं।