हरदोई। मल्लावां में उन्नाव मार्ग पर मोहिउद्दीनपुर में सड़क किनारे झोपड़ी में रहने वाले ज्यादातर परिवार आम लोगों के लिए हमेशा ही खुशी का सबब रहे।
कभी अपने लंगूरी बंदर के साथ मोहल्लों और गांवों में आने वाले बंदरों को खदेड़ते समय लोग इन परिवारों पर खुश हो लेते तो कभी बंदरों के साथ कलाबाजी करते हुए बधाई बजाने वाले यह परिवार लाेगों को दुआएं देते। कौन जानता था कि कलाबाजी से लोगाें को खुश करने वाले अवधेश और उसका परिवार जिंदगी की कलाबाजी में मौत से एक झटके में बाजी हार जाएगा।
मोहिउद्दीनपुर में रहने वाले अवधेश उर्फ बल्ला खुशी के पलों में लोगों के यहां ढोलक की थाप पर बधाई बजाता था। उसने लंगूरी बंदर पाल रखा था, तो डेरों की तर्ज पर उसके यहां कुत्ते भी पले हुए थे। मल्लावां कस्बे से लेकर आसपास के गांवों में शायद ही कोई ऐसा हो जो सड़क किनारे खुशी बांटने वाले इन परिवारों से परिचित न हो। रोज की तरह मंगलवार की रात भी अवधेश अपने परिवार के साथ हंसते गाते सोया था।
बुधवार की सुबह उसे मल्लावां के पास स्थित एक गांव में बाग में लंगूर को लेकर जाना था। वजह यह कि वहां बंदर आम की फसल को नुकसान पहुंचा रहे थे। लंगूर के साथ अवधेश की कलाबाजी से बंदर भाग जाते हैं। इसीलिए उसे बुलाया गया था। आधीरात के बाद ही ऐसा हादसा हुआ कि जिंदगी की कलाबाजी में अवधेश मौत से परिवार समेत बाजी हार बैठा। अब न तो अवधेश की बधाई सुनाई देगी और न ही उसकी कलाबाजी दिखेगी। (संवाद)
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कहीं न कहीं अवधेश के लंगूर ने उसकी नातिन बिट्टू को बचा लिया। सुबह लगभग पांच बजे सबसे आखिरी में बालू और ट्रक के नीचे से बिट्टू को निकाला गया। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक बिट्टू से ही लंगूर भी चिपका था। माना जाता है कि आमतौर पर ऐसी घटना में लंगूर या बंदर आसपास मौजूद लोगों को काटते हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ।
नट बिरादरी के लाेगों के पास जो कुत्ते होते हैं वह काफी खतरनाक होते हैं। यह कुत्ते बहुत जल्दी हमलावर हो जाते हैं। आसपास से किसी अंजान के निकलते ही यह कुत्ते तीखे तेवर अपना लेते हैं। मंगलवार आधीरात के बाद हुए हादसे के बाद अवधेश का कुत्ता बेहद शांत नजर आया। अवधेश का शव जाने के बाद वह उसी बालू के ढेर पर बैठ गया, जिसके नीचे से अवधेश का शव निकला था।