पोषण पुनर्वास केंद्र पर अतिकुपोषित बच्चे को भर्ती कराने के लिए पुलिस का
सहारा लेना पड़ गया। सुरसा के ग्राम हुसियापुर में एक बच्ची को अति कुपोषण
के बावजूद पिता द्वारा उसे भर्ती नहीं कराया जा रहा था। ऐसे में डीपीओ ने
पुलिस को सूचना दी तो एसओ ने पिता पर कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसके बाद
बच्ची को भर्ती कराया गया और उसका उपचार किया जा रहा है।
बच्चों
में अति कुपोषण के उपचार को जिला अस्पताल द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र
संचालित होता है। जहां बच्चों का निशुल्क उपचार तो किया ही जाता है, साथ ही
बच्चे के परिवार को निशुल्क भोजन तथा 14 दिन तक भर्ती करने के लिए
प्रतिदिन सौ रुपये के आधार पर 1400 रुपये दिए जाते हैं।
सरकार तो कुपोषण से
बचाव को लेकर काफी प्रयास कर रही, पर कुछ अभिभावक ऐसे हैं जो अपने बच्चे
का उपचार ही नहीं चाहते। ऐसा ही वाक्या मंगलवार को संज्ञान में आया। विकास
खंड सुरसा के ग्राम हुसियापुर में एक ढाई साल की बच्ची रूबी में अतिकुपोषण
के लक्षण मिले।
चूंकि, हुसियापुर गांव को राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत सीडीओ
ने गोद ले रख है। ऐसे में सीडीपीओ प्रियंका गुप्ता ने बच्ची के उपचार को
उसके पिता विशेष कुमार को पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कराने को कहा। पर,
उसने बच्ची को भर्ती कराने से मना कर दिया। काफी दिनों तक उसे हिदायतें दी
जाती रहीं, पर उसने ध्यान नहीं दिया।
धीरे-धीरे उसके अन्य बच्चों में भी
कुपोषण के लक्षण नजर आने लगे और रूबी की हालत बिगड़ने लगी तो सीडीपीओ ने
जिला कार्यक्रम अधिकारी को जानकारी दी। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश
कुमार ने इस मामले की जानकारी एसओ सुरसा मदन गोपाल गुप्ता को दी।
एसओ सुरसा
ने तत्काल गांव जाकर रूबी के पिता विशेष कुमार को बच्ची की मृत्यु होने पर
हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने की चेतावनी और रूबी को पोषण पुनर्वास केंद्र
पर लाकर भर्ती कराया। जहां उसका उपचार शुरू करवा दिया गया।