कटरा-बिल्हौर हाईवे स्थित नदियों के जर्जर पुल हादसों
को दावत दे रहे हैं। आलम यह है कि सांडी से हरपालपुर के बीच पड़ने वाली
नीलम नदी (लमकन) के पुल के पिलर में दरार पड़ गई है, वहीं पुल की
बाउंड्रीवाल और फर्श मेें भी दरारें हैं। इधर, इसी मार्ग पर गर्रा नदी
(बरौलिया) का पुल भी जर्जर हालत में है।
ऐसे में इस नदी पर से गुजरने वाले
भारी वाहनों के लिए खतरा मंडरा रहा है। अबकी बाढ़ आई तो किसी भी हादसे
से इंकार नहीं किया जा सकता है। हैरत की बात है कि विभागीय अधिकारी इन
पुलों का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज चुके हैं, पर अब तक पुलोें के
निर्माण को शासन से हरी झंडी नहीं मिली।
वर्ष 1970 के दशक में बने इन पुलों
की हालत दिनों दिन दयनीय होती जा रही है। दो साल पहले नीलम नदी के पुल की
सपोर्टिंग दीवार धासक जाने व पुल के बीच हिस्सा गिरने से सेना के जवानों ने
पुल से आवागमन रुकवाकर वाहनों को सांडी से हरदोई होकर सवायजपुर के डायवर्ट
कर दिया था।
काफी मशक्कत के बाद पुल की मरम्मत हुई, इसके चलते करीब 2
महीने पुल से आवागमन बाधित रहा। इन दिनों नदी में पानी बढ़ने के कारण इस
पुल के खंभे में फिर दरार आ गई है। वहीं बाउंड्रीवाल व फर्श क्षतिग्रस्त
हो रही, पर जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। इधर, इसी मार्ग पर स्थित
गर्रा नदी (बरौलिया) पुल जर्जर हालत में है।
इस पुल पर कई बार गड्ढे बने,
बाउंड्रीवाल टूटी है, पर मरम्मत करवाकर काम चलवाया जा रहा है। अब बारिश के
साथ संभावित बाढ़ का लेकर यह दोनों पुल एक बार फिर डैंजर जोन की निगाह से
देखे जा रहे हैं। ऐसे में बढ़ते यातायात के भार के दबाव में यदि पुल ढह गए
तो उस क्षेत्र का जिला मुख्यालय आदि से तो संपर्क टूटेगा ही, साथ ही
यातायात को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती है।
पुल ढहने पर या खिसकने पर यह बढ़ी
दुर्घटनाओं का सबब बन सकते हैं। उधर, पुलों की सेहत एवं हाईवे के भारी
वाहनों के यातायात को देखते हुए ब्रिज कारपोरेशन एवं पीडब्ल्यूडी के
अभियंता दो वर्ष पूर्व नए पुलों की संस्तुति कर चुके हैं। इस क्रम में
पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के साथ उत्तर प्रदेश ब्रिज कारपोरेशन के सहायक
अभियंताओं द्वारा मौका मुआयना किया जा चुका है।
सूत्रों का कहना है कि इस
निरीक्षण में पुल के लाइफ टाइम को देखते हुए और बढ़ते भारी वाहनों के
यातायात की जरूरतों को लेकर समीक्षा हुई थी, जिस पर नए पुल बनाने की जरूरत
महसूस करते हुए बड़े अफसरों को अवगत कराया गया था।