हरदोई। सजा सुनाए जाने से पहले जज ने अभियुक्त गुड्डू उर्फ गब्बू से सवाल किया कि क्या उसे कुछ कहना है। इस पर गब्बू ने पूरी अकड़ के साथ जवाब दिया कि जैसा सही समझें, वैसा करें। जैसा वकील लोग बताएं वैसा करें।
इसके बाद उसे कटघरे में खड़ा कर दिया गया और जब जज ने सजा सुनाई तो गब्बू के हाथ-पैर कांपने लगे और वह कटघरे में ही बैठ गया। गुमसुम बैठे गब्बू ने न तो किसी से कोई बात की और न ही न्यायालय के फैसले को लेकर कोई टिप्पणी।
मौत की सजा सुनाए जाने का पता चलते ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी न्यायालय पहुंच गए। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे जिला कारागार वापस भेज दिया गया। देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 17 मार्च 2014 को डेढ़ साल की बच्ची की गांव के ही गब्बू ने दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में गब्बू को फांसी की सजा सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत ने सुनाई है।
इनसेट
घटना के बाद से ही परिजनों ने गब्बू से तोड़ लिया था नाता
आरोपी के गांव के लोग बताते हैं कि घटना से गब्बू के परिजन खासे गुस्से में थे। आलम यह था कि गब्बू को जेल भेजने के बाद उसके दो भाइयों में से कोई भी जिला कारागार में गब्बू से मुलाकात करने नहीं गया। इतना ही नहीं परिजनों ने पैरवी कराने से भी इनकार कर दिया।
नतीजा यह हुआ कि न्यायालय के निर्देश पर गब्बू को एक अधिवक्ता की व्यवस्था कराई गई। गब्बू तीन भाइयों में बड़ा है। गब्बू की शादी नहीं हुई है, जबकि उसके दोनों छोटे भाइयों का भरा पूरा परिवार है। सजा सुनाए जाने के दौरान भी गब्बू के परिवार का कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं रहा।
होली मिलने आया था, जिंदगी का रंग उड़ा दिया
बच्ची के परिजनों के साथ गब्बू के ठीक-ठाक संबंध थे। रंग खेलने वाले दिन ही देर शाम गब्बू बच्ची के घर पर होली मिलने गया था। घर में बच्ची की दादी, मां थीं, जबकि पिता गांव में परिचितों के यहां होली मिलने गया था। बच्ची को दुलारते हुए गब्बू ने गोद में उठा लिया था और घर वाले उसके लिए नाश्ता लगा रहे थे। इसी दौरान वह बच्ची को लेकर घर से बाहर निकल गया। इसके बाद जो कुछ हुआ, उससे बच्ची के परिजनों को ऐसा दर्द मिला कि जिंदगी का रंग ही उजड़ गया।
गब्बू ने पार कर दी थी हैवानियत की हदें
मासूम बच्ची के साथ आरोपी गुड्डू उर्फ गब्बू ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि गुड्डू ने मासूम के साथ किस कदर दरिंदगी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक मृतका के दोनों होठों पर काटे जाने के निशान मिले थे, जिसकी वजह से होठ नीले पड़ गए थे। मासूम के चेहरे के बायीं ओर नाखून के निशान मिले थे। दोनों जांघों की ओर खून के धब्बे मिले थे। उसका नाजुक अंग फट गया था और उसमें 10 मिलीलीटर खून मिला था। मासूम की मौत नाक और मुंह दबाये जाने के कारण दम घुटने से हुई थी।
कब क्या हुआ
-17 मार्च 2014 को मासूम बच्ची हुई थी लापता
-18 मार्च 2014 को मिला था बच्ची का शव
-18 मार्च 2014 को दर्ज हुई थी दुष्कर्म के बाद हत्या की रिपोर्ट
-14 मई 2014 को पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
-18 सितंबर 2014 को आरोप तय हुए
-19 जनवरी 2015 को मामले में हुई पहली गवाही
-19 जनवरी 2021 को हुई मामले में आखिरी गवाही
-18 फरवरी 2021 को दोष सिद्ध करार दिया गया
-22 फरवरी 2021 को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई
रामचरित मानस की चौपाई पढ़कर न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
हरदोई। मासूम बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या का फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत ने रामचरित मानस की चौपाई पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में कहा गया है कि... अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।। इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई।।
न्यायाधीश ने इस अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि छोटे भाई की स्त्री, बहन, पुत्र की स्त्री और कन्या ये चारों समान हैं। इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसका वध करने में कोई पाप नहीं होता। इसके बाद न्यायाधीश ने गुड्डू उर्फ गब्बू को मौत की सजा सुना दी। सजा सुनाने के बाद न्यायाधीश ने कलम तोड़ दिया और अपने कार्यालय कक्ष में चले गए।
फैसला सुनाते समय उन्होंने कहा कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध न सिर्फ बर्बर, क्रूर व अमानवीय है। अपितु यह अपराध मानवता की हत्या के बराबर है। उन्होंने कहा कि एक अबोध बालिका जो असहाय और बचावविहीन अवस्था में थी, उसके साथ दुष्कर्म किया और साक्ष्यों को मिटाने के लिए हत्या कर शव को तालाब में फेंक दिया। यह क्रूरता की पराकाष्ठा है। उसने जो कृत्य किया है, ऐसा कृत्य जंगली जानवर और हिंसक जानवर भी अपने या दूसरे जानवरों के बच्चों के साथ नहीं करते।
वर्जन...
भारतीय समाज में कन्या को पूज्यनीय माना जाता है। अव्यस्क कन्याओं को विशेषतय: 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का रूप मानते हुए उनकी पूजा की जाती है और उनके पांव भी धोये जाते हैं। जिस देश में कन्याओं के प्रति इतने उच्च सामाजिक मानक हों, वहां पर डेढ़ साल की अबोध बालिका के साथ इस तरह का कुकृत्य निश्चित रूप से कठोरतम दंड से दंडित किए जाने योग्य है।-चंद्र विजय श्रीनेत, अपर जिला सत्र न्यायाधीश (पाक्सो)।
फोटो- 28- चंदन सिंह। संवाद- फोटो : HARDOI
फोटो- 29- रामचंद्र राजपूत। संवाद- फोटो : HARDOI
फोटो- 30- राधेश्याम सिंह। संवाद- फोटो : HARDOI