परिवहन निगम की उदासीनता के चलते तहसील मुख्यालयों पर
रोडवेज बस स्टैंड न होने से यात्रियों को खुले आसमान के नीचे बस के लिए
घंटों इंतजार करना पड़ता है। यही प्राइवेट बसाें की स्थिति है। इनके लिए भी
कहीं टीन शेड आदि नहीं डाला गया, जिससे यात्री सड़क पर खड़े होकर बस का
इंतजार करते हैं।
हैरत की बात है कि जिन स्थानों पर सरकारी व प्राइवेट बसें
रुकती हैं, उनके इर्द गिर्द लगे हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, जिससे
यात्रियों को पेयजल के लिए भी पानी की बोतल लेनी पड़ रही है। उधर, प्राइवेट
बस और टेंपो संचालकों की यूनियन बनीं है, पर यूनियन की ओर से नगर के
प्रमुुख स्थानों पर प्याऊ लगवाना उचित नहीं समझा जाता।
सूत्रों की मानें तो
यूनियन के संचालक टेेंपो और बसों से प्रतिमाह चंदे के नाम पर काफी पैसा
जमा कराते हैं, पर यात्रियों व वाहन संचालकों की सुविधा के लिए संसाधन
उपलब्ध नहीं कराते। लखनऊ हरदोई रोड स्थित संडीला
में पेट्रोल पंप के पास रोडवेज डिपो की बसें रुकती हैं।
अर्से से इस स्थान
पर न तो टीन शेड डाला गया है, न ही पेयजल की व्यवस्था की गई है। यात्री
तपती धूप में घंटाें बस के इंतजार में खड़े रहते हैं। इस स्टैंड से लखनऊ,
उन्नाव व हरदोई के लिए प्रतिदिन 1000 से अधिक यात्री आते जाते हैं। यहां
पर लगा एक हैंडपंप भी काफी समय से खराब पड़ा है।
इसकी मरम्मत को यहां के
लोगाें ने अधिकारियों से मांग की, पर इस हैंडपंप को ठीक कराने की जहमत नहीं
उठाई गई, वहीं इससे चंद कदम दूरी पर प्राइवेट बस स्टैंड है, पर यहां भी
यही स्थिति बनी रहती है। बिलग्राम रोड स्थित
तिराहे पर रोडवेज बस का स्टापेज बना है, लेकिन यहां पर न तो यात्रियों के
बैठने के लिए व्यवस्था है न ही टीन शेड पड़ा है। यहां भी पेयजल की कोई
व्यवस्था नहीं है।
यात्रियों को पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती
है। इस स्थान से प्रतिदिन कानपुर, कन्नौज, उन्नाव, फर्रुखाबाद और हरदोई के
लिए करीब 1200 से 1500 यात्री बसोें से रवाना होते हैं। प्राइवेट बस स्टैंड
पर भी अमूमन ऐसी ही स्थिति है। हैरत की बात है कि क्षेत्रीय
जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
कटरा-बिल्हौर हाईवे स्थित सवायजपुर तहसील मुख्यालय पर भी कोई स्टैंड नहीं
है, जिससे रोडवेज व प्राइवेट बसें मुख्य मार्ग के किनारे बस खड़ी कर
यात्रियों को बैठाते और चढ़ाते हैं। इस स्टैंड पर करीब 1500 से अधिक यात्री
बस द्वारा हरदोई, फर्रुखाबाद, कानपुर, बरेली रूट पर यात्रा करते हैं।
यहां
की स्थिति यह है कि जिस दुकान के सामने बस खड़ी होती है, यात्रियों को उसी
से पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। रोडवेज की ओर से अब तक कोई टीन शेड की
व्यवस्था नहीं की गई न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान दिया।
शाहाबाद-शाहजहांपुर रोड पर सड़क किनारे बसों को रोक कर सवारियों को
बैठाया और उतारा जाता है। विकास का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि भी जनता के
लिए बस स्टैंड यहां नहीं बनवा सके । इस स्टैंड से हरदोई, शाहजहांपुर, पाली,
फर्रुखाबाद व बरेली रूट पर जाने वाली बसों पर यात्री सवारी करते हैं।
स्थानीय लोगों की माने तो प्रतिदिन करीब 2000 यात्री सरकारी व प्राइवेट
बसों से यात्रा कर रहे। फिर भी उन्हें विभाग की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध
नहीं हो रही। इतना ही नहीं यहां भी पेयजल की समस्या बरकरार है। इसी तरह सदर तहसील मुख्यालय पर रोडवेज बस स्टैंड है, लेकिन प्राइवेट बस
स्टैंड व टेंपो स्टैंड न होने से इन वाहनों पर यात्रा करने वालों को
दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
टेंपो चालक अपनी मनमानी से जगह जगह टेंपो
को खड़ा कर देते हैं, जिससे अकसर जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं
प्राइवेट बस चालक नुमाइश चौराहे से सोल्जर बोर्ड चौराहे के बीच सड़क किनारे
बसें खड़ी कर देते हैं, जिससे इस मुख्य मार्ग पर जाम लगा रहता है।