संवाद न्यूज एजेंसी
हरपालपुर। कटियारी क्षेत्र में बाढ़ का पानी अब सिमटने लगा है। इसके बाद गांवों के मार्ग कट जाने से आवागमन ठप होने के साथ कीचड़ व गंदगी से बाढ़ प्रभावित लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे गांवों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका है। सितंबर के 20 दिन में 38 लोगों में टाइफायड के लक्षण मिले हैं।
गंगा, रामगंगा नदी में बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से यहां पर गंगा, रामगंगा व गर्रा के साथ गंभीरी व नीलम नदी में पानी बढ़ने से अगस्त माह से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। बाढ़ के पानी से करीब 100 गांव की फसले बर्बाद हुईं हैं। एक दर्जन मार्ग क्षतिग्रस्त होने से आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दोबारा आई बाढ़ में एक दर्जन नए गांवों को भी बाढ़ के पानी ने अपनी चपेट में ले लिया था। इसमें मोल्हनपुर, सुरजूपुर दुर्जना, नगला भूपतिपुर, सिरसा, बर्रा आदि गांव भी पानी से पूरी तरह घिर गए थे। हालांकि अब बाढ़ का पानी सिमटने लगा है। इससे गांव में कीचड़ व गंदगी से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में बुखार समेत तमाम बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर की लैब में एक से 20 सितंबर तक डेंगू की 29 जांच कराई गई। इसमें एक भी रोगी नहीं मिला। मलेरिया की 142 रोगियों की हुई जांच में कोई मरीज नहीं मिला। संदिग्ध टाइफाइड के 210 रोगियों में से 38 रोगी टॉयफाइड बुखार के लक्षण मिले हैं।