एआरटी लिंकेज सिस्टम के बाबत जानकारी देते जिला अस्पताल के आईसीटीसी के परामर्शदाता प्रहलाद सिंह गौड़।
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हरदोई। एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती का इलाज अब जिला व प्रदेश बदलने के बाद नहीं रुकेगा और न ही अन्य प्रांतों के अस्पतालों में जाने के बाद उन्हें अपना इलाज फिर से शुरू करवाना होगा। स्वास्थ्य महकमे ने पूरे देश में एआरटी लिंकेज सिस्टम लागू कर गर्भवती एचआईवी पीड़ितों को बड़ी राहत दी है। जनवरी में लांच किए गए सॉफ्टवेयर में पूरे देश क ी एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं का डाटा होगा। यूनिक कोड डालते ही उनकी पूरी प्रोफाइल स्क्रीन पर सामने होगी जिसके बाद उनको चिकित्सीय परामर्श के साथ दवाओं का वितरण आसानी से हो सकेगा।
जिले में एड्स पीड़ितों की संख्या 13 है। स्वास्थ्य विभाग के सरकारी आंकड़ों की मानें तो प्रत्येक वर्ष पॉजिटिव पाए जाने वाले पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की संख्या भी लगभग बराबर ही रहती है। खास बात यह है कि इनमें गर्भवती भी एचआईवी पॉजिटिव पाई जाती रही हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान खतरे में होती है। अधिकांश मामलों में देखा गया है कि मजदूरी करने वाले परिवार अपने जिला व प्रांत बदलते रहते हैं। अपने साथ अपनी पत्नियों को भी ले जाते हैं।
जिसके चलते यदि इस जिले में इलाज उनका इलाज परामर्श केंद्र पर चल रहा होता है तो अन्य प्रांत में या तो वह अपने साथ पुराने चिकित्सीय परामर्श के पेपर ले जाना भूल जाते हैं या फिर गैर प्रांत में चिकित्सकों के सामने अपनी पूरी बात नहीं रख पाते हैं। जिससे उनका इलाज या तो रुक जाता है या फिर नए सिरे से शुरू होता है। जिससे उनके स्वास्थ्य व जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इसको गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे देश में एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती को प्रोटेक्शन देने के लिए एआरटी लिंकेज सिस्टम लागू कर दिया है। जिसमें पूरे देश की अब तक चिन्हित गर्भवती महिलाआें को फीड किया जाएगा। उन्हें एक यूनिक कोड नंबर दिया जाएगा। जिसके माध्यम से वह किसी भी जिले या प्रांत में क्यों न चली जाए उनकी प्रोग्रेस फाइल वहां के अस्पताल की स्क्रीन पर डॉक्टर के सामने उस समय होगी जब वह इलाज कराने के लिए पहुंचेगी।
जिला अस्पताल के एकीकृत परामर्श केंद्र के परामर्शदाता प्रहलाद गौड़ ने बताया जनवरी में ही इसे पूरे देश में लागू किया गया है। इससे एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती के लिए काफी राहत भरा साबित होगा। साफ्टवेयर में इनका पूरा डाटा रहेगा जिसके बाद माध्यम से पूरे देश में उनका इलाज चलता रहेगा। उनका इलाज कभी भी बंद नहीं होगा। जिले में महिला अस्पताल, बिलग्राम, कछौना व संडीला सीएचसी को लॉग इन नंबर एलॉट किए जा रहे हैं। जिसके बाद चिन्हित एचआईवी पॉजिटिव का डाटा फीड करने का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।