हरदोई। वर्ष 1978 में सहकारिता के डेलीगेट चुनाव के दौरान तत्कालीन लोनार कोतवाली क्षेत्र के सैतियापुर गांव में हुए खूनी संघर्ष के मामले में न्यायालय ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। लगभग 48 साल पुराने इस मामले में अपर जिला जज (कोर्ट संख्या - 6) शैलेंद्र यादव ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया है। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत भी हो चुकी है। कुल छह लोगों पर जानलेवा हमले और बलवे की प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सैतियापुर निवासी सरनाम ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि दस अप्रैल 1978 को गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहकारिता के डेलीगेट का चुनाव था। चुनाव के दौरान अनियमितता को लेकर विवाद हो गया था। इसके कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था। आरोप था कि चुनाव स्थगित होने के बाद गांव निवासी राम बक्श की चौपाल के पास दो पक्ष आमने सामने आ गए थे। लाठी डंडे चलने के बाद मौके पर गोली भी चल गई थी। गोली लगने से गांव निवासी बलराम सिंह घायल हो गए थे, जबकि अन्य लोगों को भी चोटें आई थीं।
मामले में पुलिस ने शिवराम सिंह, रामनरेश सिंह, रसाल सिंह, शिव सिंह, नन्हें सिंह और बादशाह सिंह के खिलाफ जानलेवा हमला और बलवे की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। शिवराम सिंह, रामरेश सिंह और रसाल सिंह का निधन सुनवाई के दौरान हो जाने के कारण कार्रवाई पूर्व में ही समाप्त कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह सरनाम, राजवीर सिंह और सीताराम सिंह भी पूर्व के बयानों से न्यायालय में मुकर गए थे। मामले की सुनवाई पूरी कर न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध कर पाने में असफल रहा।
न्यायालय ने पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के अभाव में शिव सिंह, नन्हें सिंह और बादशाह सिंह काे दोषमुक्त कर दिया। फैसला सुनाए जाने के समय आरोपी शिव सिंह को फतेहगढ़ के केंद्रीय कारागार से यहां लाया गया था। मामले में दोषमुक्त किए जाने पर अपर जिला जज ने जेल अधीक्षक को रिहाई परवाना भेजकर अन्य किसी मामले में वांछित न होने पर रिहा करने के निर्देश भी दिए हैं।