हरदोई। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी अक्षय तृतीया का पर्व शुक्र अस्त होने से सोमवार सन्नाटे में गुजर गया। मांगलिक कार्यक्रम न होने से लोगों ने सोना खरीदने में रुचि नहीं दिखाई। सराफा बाजार 10 करोड़ के सापेक्ष सिर्फ दो करोड़ में ही सिमट गया।
अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जानते हैं। ज्योतिष शास्त्रों के हिसाब से अक्षय का अर्थ कभी न क्षय होने वाला। कहा जाता है कि इस दिन कोई भी साधना, हवन, जप व तप हो उसका फल जातकों को मिलता है। इस बार शुक्र अस्त ने अक्षय तृतीया के सभी पौराणिक तथ्यों को दरकिनार कर दिया। मांगलिक कार्यक्रम नहीं हुए, सोना चांदी, कपड़े व अन्य सुहाग की सामग्री भी लेने से हिचकिचाते रहे। जिसका असर सराफा बाजार पर पड़ा। सराफा व्यापारियों का कहना है कि जहां पूरे जिले में 3500 सराफा दुकानों में 10 से 12 करोड़ का अक्षय तृतीया पर व्यापार हो जाता था इस बार दो करोड़ का अनुमान है।
100 बरस बाद अक्षय तृतीया में नहीं हुए विवाह
सौ बरस बाद अक्षय तृतीया में कोई विवाह और मांगलिक कार्यक्रम नहीं हुए हैं। उमाकांत शास्त्री ने बताया कि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 24 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहा था। इसमें खरीददारी शुभ थी। अक्षय तृतीया पर सोना, चांदी, जमीन खरीदना, गृह प्रवेश, नया व्यापार करना, तीर्थ यात्रा को शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार शुक्र अस्त को देखकर लोगों में सोना चांदी खरीददारी के प्रति जागरूकता का अभाव दिखा।
चार अभिजीत मुहूर्तों में से एक है अक्षय तृतीया
भारतीय कालगणना के अनुसार चार स्वयं सिद्ध अभिजीत मुहूर्तों में से एक है अक्षय तृतीया। अक्षय तृतीया यानी आखा जीत को मिलाकर चार ऐसे मुहूर्त हैं जिनमें कोई भी मांगलिक कार्य शुभ माना जाता है। इनमें चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, दशहरा व दीपावली को भी अभिजीत मुहूर्तों में शामिल किया जाता है।
सजे बाजारों में ग्राहकों का ज्यादा दिखा टोटा
अक्षय तृतीया को लेकर बाजार सजे दिखे। सराफा शोरूमों से लेकर कपड़ों की दुकानों को जहां खास तौर से ग्राहकों को लुभाने के लिए सजाया गया। वहीं चूड़ी व सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर भी तैयारियां नजर आईं। लेकिन इसके बाद भी सराफा दुकानों पर भले ही सोना खरीदने को ग्राहक पहुंचे हो लेकिन सुहाग सामानों की दुकानों जैसे चूड़ी आदि की दुकानें पूरी तरह से सन्नाटे में दिखाई दीं।