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निजीकरण के विरोध में कर्मियों का प्रदर्शन

Fri, 26 Jun 2015 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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देबराय कमेटी की सिफारिशों में रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की रिपोर्ट के विरोध में आवाज तेज होने लगी है। सिफारिशों में रेलवे के अंतर्गत आने वाली तमाम सुविधाओं का निजीकरण करने की रिपोर्ट पर रेल कर्मियों ने नारेबाजी की। गुरुवार को स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर धरना प्रदर्शन कर नार्दन रेलवे मेंस यूनियन के पदाधिकारियों ने सिफारिशों पर अपने सुझाव दिए।
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रेलवे के निजीकरण की देबराय कमेटी की सिफारिशों के विरोध में यूनियन के पदाधिकारियों ने धरना दिया। सहायक मंडल मंत्री कुंवर सुहेल ने कहा कि कमेटी में जिन सिफारिशों का जिक्र किया गया, उनसे जनता और कर्मियों को नुकसान होगा।

अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि देबराय कमेटी द्वारा रेलवे के निजीकरण की सिफारिश राष्ट्रीय तंत्र को छिन्न भिन्न कर देगी। रिपोर्ट में रेलवे को वाणिज्यिक संस्थान के रूप में चलाने की बात कही। पालिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर संचालन में देसी, विदेशी पूंजी को लगाने की योजना, इंडियन रेलवे मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी बनाकर उत्पादन व इकाइयों को लाने और मेंटीनेंस वर्कशापों को भी रेलवे से अलग करने की बात कही।
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इंजन से लेकर कलपुर्जे तक रेलवे से बंद करने तथा रेलवे से अलग एक रेलवे रेग्यूलेटरी अथॉरिटी बनाकर मुुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त व आरडीएसओ को अधीन करने की बात कही। समूह ग के आठ मुख्य श्रेणियों को समाप्त कर इंडियन रेलवे टेक्निकल सर्विसेज लाजिस्टिक सर्विस में नियुक्त करने की सिफारिश की।

रेलवे के अस्पताल, स्कूल, खानपान सेवा व रियल स्टेट भी निजी हाथों में देने तथा भारतीय रेल में जोनों की ज्यादा संख्या पर पुनर्गठन समेत तमाम अन्य सिफारिशें की। जिसका विरोध रेलवे कर्मियों ने कर अपने सुझाव दिए और सिफारिशों को रद  कराने को मुहिम छेड़ने की अपील की।

धरने पर संघ सचिव एसके श्रीवास्तव, लाल सिंह, सुभाष अवस्थी आदि मौजूद थे। उधर, देबराय कमेटी की सिफारिशों के विरोध में कर्मियों ने भी अपने सुझाव दिए हैं। जिसमें भारतीय रेल में उदारीकरण की प्रक्रिया अपनाने, रेलवे बोर्ड की संरचना में बदलाव हो और यात्री एवं मालगाड़ी चलाने एवं पूंजी निवेश का मौका दिया जाए।

दो वर्ष के मध्य मंडल, जोन का केंद्रीयकरण एवं विकेंद्रीकरण कर रेल एवं केंद्र सरकार के बीच वित्तीय संबंध का निर्धारण हो, दो वर्ष के बाद स्कूल, रेलवे अस्पताल, निर्माण यूनिट उत्पादन इकाइयों को भारतीय रेल से अलग करने व तीन वर्ष के बाद रेलवे एक्ट एवं बोर्ड में व्यापक परिवर्तन एवं स्वतंत्र रेलवे रेग्यूलेटरी अथारिटी का गठन करने तथा रेलवे को रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन एवं ट्रेन आपरेटर में बांट कर रेल बजट को बंद करने की सिफारिश की।
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