हरदोई। गैरइरादतन हत्या और डकैती समेत कई धाराओं के नौ साल पुराने मामले में एक अभियुक्त को दोषी करार दिया गया है। अपर जिला जज कोर्ट संख्या तीन योगेंद्र चौहान ने अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाई है। 31 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माने की आधी रकम क्षतिपूर्ति के तौर पर वादी को दिए जाने के आदेश भी दिए गए हैं।
पाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला शेख सराय निवासी अफसर अली ने चार अप्रैल 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि तीन अप्रैल 2016 की रात लगभग 12 बजे वह अपनी मां भूरी के साथ आंगन में सो रहा था। इसी बीच शाहजहांपुर जनपद के थाना कटरा क्षेत्र के जवाहर नगर निवासी राजेंद्र और लाली व जालौन जनपद के कालपी थाना क्षेत्र के छौंके गांव निवासी राजाबाबू दीवार कूदकर घर में घुस आए थे। आहट सुनकर वह जग गया था। इतने में एक आरोपी ने उसकी कनपटी पर तमंचा लगा दिया था।
विरोध करने पर जान से मारने की नियत से डंडा मार दिया था। मां के पास से 17 हजार रुपये व उनके कुंडल निकाल लिए थे। शोर सुनकर मोहल्ले वाले आ गए थे। उनकी मदद से मां को सीएचसी पाली में भर्ती कराया था। वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ लूट व हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही छह अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। सुनवाई के दौरान राजाबाबू और लाली फरार हो गए थे। इस कारण 23 जून 2023 से उनकी पत्रावली अलग कर दी गई है। दोनों पक्षों को तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने राजेंद्र को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है।
आधुनिक पुलिस 26 माह में नहीं खोज पाई दो आरोपी
मुकदमे में आरोपी दो लोगों की फाइल 23 जून 2023 को अलग कर दी गई थी। इसकी वजह तलाशने पर पता चला कि जालौद निवासी राजाबाबू और शाहजहांपुर निवासी लाली को पुलिस तलाश ही नहीं कर पाई। अगर यह मान भी लिया जाए 23 जून 2023 से पहले तक दोनों आरोपी न्यायालय में पेशी पर आते थे तो भी 26 माह में पुलिस दोनों को खोज नहीं पाई। जाहिर सी बात है कि यह आधुनिक पुलिस के लिए चुनौती जैसा है।
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हत्या डकैती के दौरान मारपीट का आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
हरदोई। पाली नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष के भाई की हत्या के मामले में अपर जिला जज कोर्ट संख्या तीन योगेंद्र चौहान ने एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। बयानों से मुकर जाने के कारण तीन लोगों के खिलाफ प्रकीर्णवाद भी दर्ज कराने के आदेश अपर जिला जज ने दिए हैं।
पाली के मोहल्ला बिरहाना निवासी नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष कमलाकांत वाजपेयी के भतीजे मयंक कुमार वाजपेयी ने चार अप्रैल 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी । इसमें बताया था कि तीन अप्रैल 2016 की रात करीब एक बजे उसके मकान में नगर पंचायत अध्यक्ष रिजवान खां, टुईयां, गुलजार, इग्गन व 30 अज्ञात लोग इनके मकान के पूरब की ओर से छत पर चढ़ आए। छत पर सो रहे मयंक के पिता ऋषीकांत वाजपेयी की गर्दन पर चाकू से वार कर दिया। शोर सुनकर बचाने आईं पत्नी और मां को भी मारपीटा। घर में रखे आभूषण भी चुरा लिए थे। इलाज के दौरान ऋषिकांत की मौत हो गई थी। पुलिस ने रिजवान, टुइया, गुलजार, इग्गन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
विवेचना के बाद पुलिस ने शाहजहांपुर जनपद के थाना कटरा क्षेत्र के जवाहर नगर निवासी राजेंद्र और लाली, जालौन जनपद के कालपी थाना क्षेत्र के छौंके गांव निवासी राजाबाबू के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। लाली,राजाबाबू सुनवाई के दौरान ही जून 2023 से फरार चल रहे है। गवाही में वादी मुकदमा मयंक कुमार बाजपेई, रीना पत्नी ऋषिकांत वाजपेयी, रजनी पत्नी मयंक अपने बयानों से मुकर गए थे। इस कारण अभियुक्त राजेंद्र को बरी किया गया है। अपर जिला जज ने तीनों के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश भी दिए है।