हरदोई। कनिष्क मेहरोत्रा हत्याकांड के आरोपियों को वकील नहीं मिले हैं। सोमवार को इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान जिला जल राजकुमार सिंह ने आरोपियों को विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कानूनी सहायता देने का निर्णय लिया है। चीफ डिफेंस काउंसिल (सीडीसी) को कानूनी सलाह व सहायता के लिए नियुक्त किया है। इस मामले में आज (मंगलवार) आरोप तय किए जाएंगे। साथ ही आरोपी नृपेंद्र त्रिपाठी की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होगी।
30 जुलाई को फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता कनिष्क मेहरोत्रा की शहर के लखनऊ रोड पर सिनेमा चौराहा के पास उनके घर में ही घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की रिपोर्ट 31 जुलाई को उनके भाई हर्ष मेहरोत्रा ने शहर कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए बताया था कि संपत्ति विवाद में वकील की हत्या की गई है। जिस मकान में कनिष्क मेहरोत्रा वर्ष 1970 से रह रहे थे, उस मकान को वर्ष 2011 में वीरे यादव, नृपेंद्र त्रिपाठी, शिखर गुप्ता और आदित्यभान सिंह ने खरीद लिया था। कनिष्क मेहरोत्रा ने मकान खाली नहीं किया था। मकान खाली कराने के लिए उक्त चारों लोगों ने रामू, राजवीर, रामसेवक और नीरज को सुपारी देकर हत्या कराई। आरोप तय करने के लिए कोर्ट ने सोमवार को आरोपियों को जेल से तलब किया। आरोपियों की ओर से कोई वकील न होने पर कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से कानूनी सहायता के लिए चीफ डिफेंस काउंसिल को नियुक्त किया है।
चीफ डिफेंस काउंसिल विनोद मिश्रा ने बताया कि आरोपियों की पैरवी के लिए उन्हें नियुक्त किया गया है। मंगलवार को आरोप तय होंगे।