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Hardoi News: आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी मंगेतर की रिमांड देने से सीजेएम ने किया इन्कार

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हरदोई। आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी मंगेतर को संडीला कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार शाम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋचा वर्मा के सामने पेश किया। पुलिस ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की लेकिन सीजेएम ने इससे इन्कार कर दिया। 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उसे रिहा करने का आदेश दिया। सीजेएम ने कई बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए संडीला कोतवाली पुलिस की कलई खोलकर रख दी।
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संडीला कोतवाली क्षेत्र के बेगमगंज निवासी संध्या ने छह मार्च की आधीरात के बाद घर में ही साड़ी से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सात मार्च को शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। बीते नौ अप्रैल को मृतका के पिता नीलकमल ने संडीला कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि संध्या की शादी लखनऊ निवासी देव के साथ तय हुई थी। शादी होने के बाद देव और संध्या मोबाइल पर एक-दूसरे से बात करने लगे थे। आरोप है कि छह मार्च को फोन पर बात के दौरान संध्या और देव के बीच विवाद हो गया। छह मार्च को ही आधीरात के बाद संध्या ने खुदकुशी कर ली थी।
दावा था कि संध्या ने परिजनों को बताया कि देव उसे शादी समारोह में जाने से रोक रहा है और कार की मांग कर रहा है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर देव के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज उत्पीड़न की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। शुक्रवार को देव को गिरफ्तार कर सीजेएम के सामने पेश किया गया। आरोपी के पास कोई अधिवक्ता नहीं था तो विधिक सेवा प्राधिकरण से उसे अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया। इस दौरान सीजेएम ने रिमांड याचिका निरस्त कर दी।
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सीजेएम ने उठाए यह सवाल
. घटना के एक माह बाद प्राथमिकी दर्ज होने की कोई वजह नहीं बताई गई।

. गिरफ्तारी के मेमो में समय ही अंकित नहीं है।
. विधि व्यवस्था में आरोपी को उसकी गिरफ्तारी की वजह बताई जाती है, जो इस मामले में नहीं बताई गई।

. आरोपी के खिलाफ जो साक्ष्य होते हैं वह रिमांड पत्रावली पर दर्ज होते हैं लेकिन इस मामले में कोई साक्ष्य दर्ज ही नहीं था।



सीजेएम ने यह की टिप्पणी

संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रत्येक नागरिक को प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार है। पुलिस ने बिना किसी वजह और साक्ष्य के देव को गिरफ्तार किया है। उसके स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन है। प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा करना मजिस्ट्रेट का कर्तव्य है।
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