हरदोई। साढ़े चार साल की मासूम के खेलते समय गायब हो जाने के बाद चारपाई पर मिले अधपके आम से परिजनों और पुलिस को अहम सुराग मिले। आम के जरिए बाग तक पहुंचे परिजनों ने जब सचिन को पकड़ा, तो वह अचकचा गया। सख्ती दिखाने पर उसी की निशानदेही पर बाग के पास ही मासूम का शव भी मिल गया। डीएनए की जांच रिपोर्ट पूरे घटनाक्रम में सजा दिलाने का मजबूज आधार बनी।
पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी वह अधपका आम बना, जो घटना के बाद बच्ची की चारपाई पर मिला था। परिजनों ने जब आम की पहचान गांव के बाग से की, तो संदेह सीधे उसी बाग में काम कर रहे बिहार निवासी नौकर (चौकीदार) सचिन पर गया। बाद में यह संदेह ही सही साबित हुआ। अभियुक्त को सजा दिलाने में वैज्ञानिक जांच ने निर्णायक भूमिका निभाई। आरोपी की निशानदेही पर बरामद गमछा और मृतका के अधोवस्त्र की डीएनए जांच कराई गई। जांच में आरोपी का प्रोफाइल मैच हो गया।
पोस्टमार्टम में दुष्कर्म और डुबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि पहले ही हो गई थी। अदालत ने अपने फैसले में माना कि घटनास्थल, बरामदगी, आरोपी का आचरण, मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए जांच और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे से इस तरह जुड़े हैं कि किसी अन्य निष्कर्ष की संभावना नहीं बचती। यही वजह रही कि अदालत ने इसे दुर्लभ और अत्यंत जघन्य अपराध मानते हुए आरोपी को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई।
दुष्कर्म के बाद प्राइवेट पार्ट पर भी किया था प्रहार
पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि होने के साथ ही प्राइवेट पार्ट पर प्रहार किए जाने की बात भी सामने आई थी। प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान मिले थे। मौके से पकड़े जाने के बाद सचिन ने पहले तो इधर उधर की बात की, लेकिन फिर पुलिस और परिजनों का सख्त रुख देखकर बता दिया कि नाले के पानी में डुबोकर मासूम को मार दिया है और घासफूस से शव छिपा दिया है।