हरदोई। पछुआ हवाओं के साथ तेज धूप से बेहाल लोगों पर अब मौसम के तीखे तेवर भारी पड़ने लगे हैं। अभी मई माह शुरू हुआ है कि तापमान का स्तर 40 डिग्री के आसपास पहुंचने लगा, जिससे धरती भी तपने लगी है। तपती धरती से जहां जल स्तर गिरने लगा है, वहीं तालाब और पोखर सूख रहे हैं।
अधिकांश तालाबों की तलहटी दिखाई पड़ने लगी है, जिससे पशुओं के लिए पीने के पानी का संकट मंडराने लगा है। इसके बाद भी ग्राम पंचायतें उदासीनता बरत रही हैं और तालाबों को पंपिंग सेटों आदि से भरवाने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, जिले में 1101 ग्राम पंचायतें हैं। प्रति ग्राम पंचायत में औसतन 4 से 5 तालाब हैं। इनमें से लगभग 2500 तालाब ऐसे हैं, जिन्हें मनरेगा में निर्मित कराया गया था। इनमें कई दर्जन तालाब ऐसे हैं, जिन्हें मनरेगा से सही कराया गया था, जबकि कई तालाबों को नए सिरे से निर्मित कराया गया था। मनरेगा में तालाबों के निर्माण पर वर्ष 07 से 10 तक खासा जोर दिया गया था।
ताकि तालाबों के माध्यम से जहां पशु-पक्षियों की पानी की जरूरत पूरी होती रहे, वहीं जल संचयन भी हो सके। खास बात यह है कि इन तालाबों के प्रति ग्राम पंचायतें पिछले लंबे समय से उदासीनता बरत रही हैं। पिछले वर्ष गर्मी में भी तालाबों को भरवाने के निर्देश दिए गए थे, पर उदासीनता बरती गई और अबकी भी इस ओर ग्राम पंचायतें फिलहाल उदासीन हैं और सूखते तालाबों को पानी से लबालब करने का कार्य नहीं किया जा रहा है। ज्ञात हो कि गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए तालाब ही पीने के पानी के लिए सशक्त माध्यम होते हैं। अगर तालाबों में पानी की उपलब्धता न बनाई गई, तो पशु पक्षियां की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
उधर, जिले में गर्मी बढ़ते ही जल स्तर गिरने लगा है, जिससे कई स्थानों पर हैंडपंपों से बालू आने लगा है। पिछले वर्ष गर्मी के मौसम में आधा मीटर से एक मीटर तक जल स्तर नीचे गिरा था, इस बार भी जल स्तर तेजी के साथ गिरने लगा है। इस संबंध में सीडीओ एके द्विवेदी ने कहा कि पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों को तालाब भरवाने तथा जल निगम को हैंडपंपों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।