फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंदूक थामने वाले हाथों ने पकड़ी कलम

Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
Hardoi
विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई। जिला जेल की काली कोठरी शिक्षा की रोशनी से जगमगाने लगी हैं। बंदूक थामने वाले हाथों ने कलम पकड़ ली है। अशिक्षा के अभिशाप से अपराध के दल दल में फंसने वाले बंदी भी शिक्षा की धारा से जुड़ कर खुद को मोड़ने लगे हैं। निरक्षर साक्षर और साक्षर शिक्षित बनने की राह पर निकल पड़े हैं। बहुतों ने सलाखों के पीछे डिग्री और डिप्लोमा तक हासिल कर लिया है।
विज्ञापन

पढ़ने लिखने की कोई आयु नहीं होती है। जिला जेल में बंद बंदियों ने यह सच साबित कर दिखाया है। जेल अधीक्षक डॉ. एसआर सिंह ने बंदियों के बीच शिक्षा की अलग जगाई और शिक्षाध्यापक जागेश्वर प्रसाद का प्रयास रंग लाया। हत्या, चोरी, लूट, दुराचार आदि मामलों म सजा काट रहे बंदी गुनाहों की सजा के साथ अशिक्षा के अभिशाप को दूर करना शुरू कर दिया है।
हत्या के मामले में जेल आया लोनार क्षेत्र के असलापुर का बच्चा बाबा, दुराचार मामले में बंद सीतापुर के रामकोट क्षेत्र के सरैया निवासी नवीन कुमार जब जेल आए थे, तो वह अंगूठा लगाते थे, पर अब वह पढ़ने लिखने लगे है और कक्षा पांच की परीक्षा दे रहे हैं।
विज्ञापन

हत्या के मामले में बंद बेनीगंज क्षेत्र के चठिया का सूरजपाल जब जेल आया तो कक्षा पांच तक पढ़ा था, पर अब वह कक्षा आठ की परीक्षा दे रहा है। बच्चा बाबा, नवीन या सूरजपाल ही नहीं जेल में बंद 208 निरक्षर बंदी साक्षर हो गए हैं, जो अंगूठा लगाते थे वह अब अपना नाम लिखने लगे हैं। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में भी 52 बंदियों ने आवेदन किया था। कुछ रिहा हो गए, पर जो रिहा नहीं हो पाए उसमें 47 ने हाईस्कूल और तीन ने इंटर की परीक्षा दी, जबकि 25 बंदी इग्नू से कई पाठ्यक्रमों की डिग्री और डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहे हैं। दो बंदी उर्दू से हाईस्कूल की पढ़ाई कर रहे हैं। महिला बंदी भी पीछे नहीं हैं। महिला बंदी रंजना, रामकली भी जब जेल आई तो अशिक्षित थीं और अब पढ़ने लगी हैं।
गुरुवार को बेसिक शिक्षा विभाग में कक्षा 5 और 8 की परीक्षा शुरू की गईं तो कक्षा पांच में नौ बंदी परीक्षा दे रहे हैं। बंदियों में 18 से लेकर 30 वर्ष तक के हैं, जबकि 19 प्रौढ़ बंदी कक्षा आठ की परीक्षा दे रहे हैं। जेल अधीक्षक ने बताया कि जिन बंदियों ने पढ़ाई शुरू की है, उन्होंने अपराध के दल दल में फिर से न फंसने की कसम
खाई है। बताया कि बंदियों की शिक्षा का विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो बंदी के स्तर और उसकी चाहत के अनुसार उसे शिक्षा की व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है और यह आगे भी जारी रहेगी। जेल में फैल रही शिक्षा की रोशनी में अनुदेशिका साधना सिंह के साथ राइटर बंदियों का भी अहम रोल है।
उधर, बंदियों में शिक्षा की अलख जगाने वाले जेल अधीक्षक का कहना है कि शिक्षा समाज का कलंक को मिटा सकती है। बंदी शिक्षित हो गए तो वह अपराध से भी दूर रहेंगे। बताया कि जेल की क्षमता 688 बंदियों की है, पर अधिकांश समय में 1200 से लेकर 1500 तक बंदी रहते हैं और उनके बीच शिक्षा के कार्यक्रम चलाए जाते हैं। हर शनिवार को बंदियों के बीच जीवन जीने की कला सिखाने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें