पिहानी (हरदोई)। चंद दिनों पहले कांवड़ लेने को हरिद्वार गए युवकों के जाल में फंस कर पिहानी पहुंची किशोरी के साथ रेप में शामिल बैंक कैशियर अमरजीत आनंद पर लगे ताजा आरोपों ने सभी को चौंका दिया है। बुधवार को कोतवाली पहुंचे दर्जनों किसानों ने कैशियर पर लाखों रुपये के हेरफेर का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। प्रभारी निरीक्षक नागेश मिश्रा ने तहकीकात के लिए आर्यावर्त ग्रामीण बैंक पण्डरवा किला शाखा के मैनेजर को तलब किया है। बैंक की ओर से आरोपी कैशियर के खिलाफ एफआईआर कराए जाने की तैयारी है। आरोपी कैशियर रेप के आरोप में इन दिनों जेल में बंद है।
यह सनसनीखेज खुलासे पिछले एक सप्ताह के दौरान अलग-अलग किसानों ने तब करने शुरू किए जब पूर्व में जमा कराया गया अपना धन निकालने को बैंक पहुंचे। यह जानकर दर्जनों लोगों के पैरों से जमीन खिसक गई कि उनके द्वारा जमा कराए गए रुपये पासबुक और पर्ची में तो दर्ज हैं पर बैंक के कंप्यूटर में फीड ही नहीं किए गए हैं। ऐसे दो दर्जन से अधिक किसानों ने बुधवार को कोतवाली पहुंच कर मामले की जानकारी प्रभारी निरीक्षक नागेश मिश्रा को दी। आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की पण्डरवा किला शाखा के खाताधारक सियाराम ने बताया कि उसने 14 जुलाई को नौ हजार रुपये जमा किए। पर्ची और किताब पर इंट्री है। काफी दिनों बाद जब वह बैंक आया तो उसे बताया गया कि खाते में उक्त रकम जमा ही नहीं हुई है।
इस्लामुददीन के अनुसार उसके साथ एक लाख रुपये की ठगी हुई है। सुशील, अनीता देवी, राकेश, रूप कुमार, चेतनी, साबिया आदि ने भी लाखाें रुपये के हेरफेर के आरोप कैशियर पर लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई है। एक अंदाजे के अनुसार किसानों के साथ लगभग पचास लाख रुपये की ठगी की गई है। इस मामले में बैंक प्रबंधक सत्यप्रकाश ने बताया कि वह अभी 17 जुलाई को ही आए हैं। गड़बड़ी के समय प्रबंधक डीसी शर्मा थे, जो अब फर्रुखाबाद चले गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों के इन आरोपों की पुष्टि करते हुए बताया कि ऐसी तकरीबन दो दर्जन शिकायतें उनके पास हैं, जिनकी पासबुक में तो रकम चढ़ा दी गई लेकिन खातों में पैसा जमा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले की छानबीन कर रहे हैं। उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी जा रही है। साथ ही उन्होंने इस मामले की एफआईआर कराए जाने की भी बात कही है।
तत्कालीन प्रबंधक की भूमिका पर भी सवाल
पिहानी (हरदोई)। लाखों रुपये के हेरफेर के इस मामले में बैंक कैशियर के साथ ही तत्कालीन बैंक प्रबधंक डीसी शर्मा की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। कैशियर ग्राहकों के साथ उनकी आंखों में भी धूल झोंकता रहा और उन्होंने इस ओर कोई संज्ञान आखिरकार क्योें नहीं लिया। मामला खुलने से पहले ही उनका अन्यत्र तबादला हो जाना या करा लिया जाना भी चर्चा का विषय है। ग्राहकों ने तो यहां तक आरोप लगाए हैं कि कैशियर के साथ ही बैंक प्रबंधक की भी इसमें मिलीभगत है।