हरदोई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय आजाद ने प्रार्थना पत्र की सुनवाई कर सिपाही के विरुद्ध एफआईआर दर्जकर विवेचना करने के आदेश एसओ सुरसा को दिए।
अदालत के समक्ष धारा 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सुरसा क्षेत्र निवासी रामू (काल्पनिक नाम) ने आरोप लगाया था कि उसकी पुत्री का अपहरण पंकज उर्फ पुष्पेंद्र कर ले गया था। आईजी से शिकायत करने के बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश हो गया। तब आरोपी पंकज व उसके पिता दाताराम ने उसकी पुत्री को थाने पर लाकर उसे सौंप दिया। पुलिस ने पहले टालमटोल कर रिपोर्ट दर्ज करने में देर की बाद में रिपोर्ट लिख ली, पर सुरसा थाना में तैनात सिपाही लक्ष्मण सिंह चंदेल इस बात का दबाव बना रहे थे कि लड़की आरोपियों के पक्ष में बयान दें।
वादी ने आरोप लगाया कि 18 जनवरी को उसकी पुत्री के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान हुए, जहां उसने विपक्षीगणों के विरुद्ध बयान दिए। इसी बात पर नाराज होकर आरोपी सिपाही ने उसी दिन शाम साढ़े छह बजे सुरसा में उसके साढू़ बालकराम को घर के सामने गाली गलौज किया। सिपाही ने उसे भी मारापीटा और धमकी दी। आरोप लगाया कि सिपाही थाने में काफी समय से तैनात है और वह धनउगाही करता है। कोर्ट ने एसओ सुरसा को आदेश दिया कि वह प्रार्थना पत्र के कथनानुसार एफआईआर दर्ज कर विवेचना करें और 10 दिन के अंदर न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।