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गुस्साए डाककर्मियों का प्रदर्शन

Fri, 14 Feb 2014 05:44 AM IST
Hardoi
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हरदोई। डाकघर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर गुरुवार को तालाबंदी कर हड़ताल कर दी। कर्मियों ने 50 फीसदी महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय करने की मांग करते हुए डाकघर परिसर में प्रदर्शन किया। इसके अलावा कई अन्य मांगों को भी उठाते हुए उनका निस्तारण होने तक समयबद्ध ढंग से विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
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अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ व नेशनल डाक कर्मचारी संघ के बैनर तले केंद्रीय कर्मचारी परिसंघ के आह्वान पर डाकघर कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया। हरदोई मंडल के लगभग सभी डाक कर्मियों ने अपने डाकघरों में तालाबंदी कर दी और प्रधान डाकघर के परिसर में एकत्रित होकर केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी की। सभी ने मांगों के संबंध में सरकारी कार्य बंद रखे और कोई भी कार्य नहीं किया। कर्मियों ने अपनी कई मांगों को बताते हुए उनको पूरा करने की अपील की। सचिव गोपाल बाजपेयी ने कहा कि सभी कर्मियों को 50 फीसदी महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय किया जाए तथा अंतरित राहत प्रदान की जाए। उन्हाेंने सातवें वेतन आयोग में जीडीएस को शामिल करने तथा कैजुअल कर्मचारियों का नियमितीकरण।
वेतन पुनरीक्षण, मृतक आश्रित कोटे में शत प्रतिशत नियुक्तियां तथा नई पेंशन योजना को रद करने की मांग उठाई। डाक कर्मियों द्वारा मांगों को लेकर पूरे दिन कोई काम नहीं किया गया। ऐसे में काउंटर सूने पड़े रहे और विभाग को लाखों के नुकसान की आशंका व्यक्त की गई। डाकघर कर्मचारियों ने मांगों के पूरा न होने पर समयबद्ध ढंग से विरोध प्रदर्शन और बेमियादी हड़ताल करने की चेतावनी दी। इस दौरान आरके दीक्षित, श्रवण पांडेय, रमेश पाल सिंह, संतोष दीक्षित, राम सिंह, अशोक मिश्रा, राकेश बाजपेयी, निर्मल स्वरूप, अखिलेश दीक्षित, राम प्रकाश अग्निहोत्री, रतिभान सिंह आदि मौजूद थे।
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उधर, ग्रामीण डाक सेवक के पद पर कार्यरत कैलाश नाथ मिश्र की डेढ़ वर्ष पहले मौत होने के बाद डाकघर के कर्मचारी नेताओं ने परिजनों का पूरा सहयोग करने का वादा किया था और तत्कालीन डाक अधीक्षक के विरोध में आए दिन धरना व प्रदर्शन तक किया, पर अब जहां एक ओर परिवार को अभी भी तक कोई लाभ विभाग से नहीं मिला, वहीं कर्मचारी नेताओं ने भी अपने साथी कैलाश को भुला दिया। गुरुवार को हुए हड़ताल व विरोध प्रदर्शन में नेताओं ने कहीं पर भी उनका नाम नहीं लिया और परिजनों की मदद की आवाज भी नहीं उठाई।
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