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फूल तोड़ना प्रकृति के खिलाफ

Mon, 23 Dec 2013 05:45 AM IST
Hardoi
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हरदोई। शहीद उद्यान स्थित कायाकल्प केंद्र पर आयोजित पुष्प व प्राणवायु स्वास्थ्य विषयक गोष्ठी में नेचरोपैथ डा. राजेश मिश्रा ने कहा कि पुष्प जब तक पौधों मेें लगे रहते हैं, तब तक प्राणवायु देते है। पौधों से पुष्प को तोड़ना प्रकृति के खिलाफ है। हमें जरूरत पूरी करने के लिए पुष्प को चुनने का काम करना चाहिए तोड़ने का नहीं।
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उन्होंने कहा कि पुष्प तोड़ना और चुनना दोनों में काफी फर्क है। जो पुष्प स्वत: पौधों से अलग हो जाते हैं, उन्हें चुनने का कार्य होता है, जबकि पौधो में लगे पुष्पों को अलग करना तोड़ने का कार्य होता है। पुष्प इस धरा के आभूषण हैं, प्रकृति का सौंदर्य है, इसे संवारना हमारा दायित्व है। उन्होंने स्वागत समारोहों में बढ़ते पुष्प माला के प्रचलन पर कहा कि हम सभी अपने स्वागत के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे है। उन्होंने कहा कि आज एरोमा थेरेपी चल रही है, जिसमें भांति के पौधों में लगे फूलों के बीच बैठकर प्राणायाम योग करना स्वास्थ्य के लाभदायक है, ऐसे में हमें इस ओर जागरूक होना होगा।
प्रोफेसर अखिलेश बाजपेयी ने कहा कि पुष्पों की सुंदरता, सुगंध एवं प्राणवायु तभी मिलेगी, जब पुष्पों को पूर्ण जीवन मिलेगा। पुष्प का चुना जाना सकारात्मक है, जबकि तोड़ना नकारात्मक है। गोष्ठी में रविकांत त्रिपाठी आदि ने पुष्पों के महत्व एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर विपिन किशोर शुक्ल, भक्ति त्रिपाठी, सुनीता, शिवबालक आदि मौजूद थेे।
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