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करबला के शहीदों के ताबूत उठा मातम

Sun, 22 Dec 2013 05:45 AM IST
Hardoi
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पिहानी (हरदोई)। इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की याद में 72 शबीहे ताबूत बरामद कर अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। कार्यक्रम के दौरान अकीदतमंदों में ताबूत के बोसे लेने की होड़ रही। महिलाओं ने चढ़ावा चढ़ाया और मन्नतें मानीं।
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शुरुआत इमामबाड़ा इरशादिया के पास मजलिस अजा के साथ हुई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कमाल अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथियों ने शहीद होकर इसलाम और इंसानियत की रक्षा की थी। जब तक दुनिया रहेगी हुसैन के मातम की धमक बाकी रहेगी। इसके बाद इमामबाड़े से 72 शोहदा-ए-करबला की शबीहे ताबूत उठे। मौलाना वजीहुल हसन ने एक-एक ताबूत के हवाले से करबला की दर्दनाक शहादत का वर्णन करना शुरू किया, तो सभी रो उठे। मौलाना ने छह माह के अली असगर की शहादत का मंजर बयान किया तो मजलिस से सिसकियों के बीच हाय हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं।
उन्हाेंने बयान किया कि यह रसूल के नवासे का ताबूत है। वो हुसैन जो रहमतुल लिल आलमीन की गोद में खेले थे। आज उसी गरदन को काट दिया गया है। जालिम फौजों ने बेसहारा औरतों और बच्चों पर भी जुल्म का सिलसिला जारी रखा। खेमे जल रहे हैं। एक बच्ची के पैरों में बेड़ियां पड़ीं हैं। यजीदी फौज की कैद में सकीना बाबा को याद कर रही है। कैदखाने में सकीना के मसायब सुनकर अजादार तड़प उठे। इस दौरान रौनके अजा, हैदरी, अकबरी, साहिबुज्जमां, अब्बासिया, सज्जादिया (पियाबाग), जुल्फिकारे हैदरी व रौनके अजा आदि अंजुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। ताबूत का यह जुलूस गांव की करबला मेें पहुंच कर संपन्न हो गया।
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