हरदोई। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ तकनीकी का प्रयोग भी करना चाहिए, ताकि वह आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सके। यह बात आइसोपाम योजना के तहत संभागीय कृषि प्रसाद केंद्र बिलग्राम चुंगी पर आयोजित किसान मेला व गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डीएम एके द्विवेदी ने कही।
उन्होंने कहा कि कृषि भूमि का सद्प्रयोग किया जाए। किसान समय के साथ चले। आधुनिक उपकरणों, उन्नत बीजों तथा सिंचाई के लिए आधुनिक तौर तरीकों का प्रयोग अवश्य करें। कहा कि जनपद में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। किसान तीन दिवसीय गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकाें द्वारा दी जाने वाली जानकारी का लाभ उठाएं। डीएम ने समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने, जैनिक खादों का प्रयोग करने और रासायनिक खादों का प्रयोग संतुलित मात्रा में करने पर बल दिया। उप कृषि निदेशक बीके त्रिपाठी ने कहा कि साढ़े तीन लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बुआई होनी है। इस वर्ष 35.39 क्विंटल हेक्टेयर का उत्पादन लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्त करने का सतत प्रयास किया जाएगा। जनपद में अभियान चलाकर बैंकों के कैंप आयोजित करके केसीसी का 63 हजार का लक्ष्य पूरा किया गया है। इस मौके पर किसान मेले में लगे स्टालों का अवलोकन भी डीएम ने किया। मेले में उद्यान विभाग, कृषि यंत्र, पशुपालन, उन्नत बीज, लघु सिंचाई, मत्स्य , आंवला प्रोडक्शन के सपना ग्रामोद्योग सेवा समिति, मृदा परीक्षण, त्रिफला आयुर्वेदिक संस्थान आदि ने स्टाल लगाए। इस मौके पर संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ, उप कृषि निदेशक शोध बृजेश चंद्र, जिला कृषि अधिकारी अमर सिंह आदि मौजूद थे।