हरदोई। संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत जिले के गांवों के सफाई कर्मियों की नियुक्ति तो कर दी, पर गांव में साफ सफाई भगवान भरोसे है। सफाई कर्मी गांव में सफाई करने नहीं जाते और अपने स्थान पर ठेके पर किसी को नियुक्त कर रखा है।
गांव में सफाई न होने से जहां एक ओर गंदगी फैली है और बीमारियों का खतरा है, वहीं सफाईकर्मी गांव व ब्लाक पर जुगाड़ भिड़ा कर वेतन भी हर माह पा रहे हैं। गांव में सफाई कार्यों को जिले के ग्रामों में सफाई कर्मियों की नियुक्ति की गई। जिले में करीब 2072 सफाई कर्मियों के पद हैं, जिसमें से 1967 सफाई कर्मियों की भर्ती की गई और अब 1937 सफाई कर्मी कार्य कर रहे हैं, जबकि हाल ही में 15 सफाई कर्मियों की भर्ती हुई है, जिनको अभी गांव आवंटित नहीं किए गए। सफाई कर्मियों को गांवों में रोजाना जाकर सफाई करने के निर्देश हैं, जिसके लिए सफाई कर्मियों को अब प्रतिमाह 11,101 रुपये वेतन मिल रहा है, जबकि उनके वेतन में से 1205 रुपये पेंशन के भी काटे जाते हैं।
इसके बावजूद भी सफाईकर्मी कार्यों के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं। गांव में सफाई कार्यों के लिए नियुक्त किए कर्मी अपने तैनाती क्षेत्र में शायद ही कभी जाते हों। गांव में न जाकर ठेके और जुगाड़ से काम चलाने वाले कर्मियों की संख्या सैकड़ों का आंकड़ा पार कर चुकी है। कइयों ने तो गांव में जरूरतमंद को ठेके पर काम दे रखा है और उन्हें अपने वेतन से थोड़ा बहुत देकर काम चला रहे हैं, वहीं वह गांव में जाने की बजाए शहर में ही रहते हैं। सैकड़ों की संख्या में सफाई कर्मी विभागों, अफसरों और रसूखदार लोगाें के बंगलों पर भी काम कर रहे हैं, जबकि गांवों में सफाई कार्य भगवान पर भरोसे है।
वैसे तो डीपीआरओ ने कई बार कार्रवाई की है, पर उसका भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, जबकि सफाई कर्मी प्रधान व ब्लाक स्तरीय कर्मियों से सांठगांठ कर अपना हर माह वेतन जारी करा रहे हैं,।जिस पर लगाम नहीं लग रही है। वैसे डीपीआरओ हरिशंकर मिंश्र ने कुछ सफाईकर्मियों को अभी निलंबित किया है, जबकि अभी निरीक्षण किए गए हैं, उन पर भी कार्रवाई होगी।