जिले के किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं
ले रही हैं। जहां बेमौसम हुई बारिश ने किसानों की रबी की फसल बर्बाद कर दी
थी, वहीं रही सही कसर चीनी मिलें पूरी कर रही हैं। जिले के गन्ना किसानों
का चाराें चीनी मिलों पर तकरीबन 98 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया चल
रहा है।
नियमानुसार गन्ना मूल्य का भुगतान गन्ने की तौल के 15 दिनों के
भीतर हो जानी चाहिए, पर यहां तो चीनी मिलों का पेराई सत्र समाप्त हुए दो
माह से ज्यादा समय हो गया और किसानों का जिले की चारों चीनी मिलों पर
करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया चल रहा है।
गन्ना विभाग से मिली जानकारी के
अनुसार, चारों चीनी मिलों पर करीब 97 करोड़ 99 लाख 34 हजार रुपये की धनराशि
किसानों की बकाया है, जिससे किसान काफी परेशान हैं। इस ओर शासन-प्रशासन से
शिकंजा कसे जाने के बाद भी चीनी मिलों से भुगतान तो हुआ, पर बाद में
प्रशासन भी चीनी मिलों पर कार्रवाई को लेकर बैकफुट पर नजर आया।
ज्ञात हो
कि जिले में 8-9 वर्षों पूर्व गन्ने का क्षेत्रफल करीब 65 हजार हेक्टेयर
था, पर किसानों को गन्ना मूल्य के भुगतान को लेकर हुई परेशानियों से किसान
गन्ने की खेती से मुंह मोड़ने को मजबूर हो रहे, जिससे क्षेत्रफल घटकर 25
हजार हेक्टेयर तक आ गया था।
इधर, किसान गन्ने की खेती के प्रति फिर से
आकर्षित हो रहे हैं, जिससे गत वित्तीय वर्ष में 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल
में गन्ने की खेती हुई थी। दो माह पहले जिले की चारों मिलों में पेराई
सत्र समाप्त हो चुका है। वैसे तो पेराई सत्र खत्म होने तक किसानों को गन्ना
मूल्य का भुगतान होने की उम्मीद जताई गई थी, पर ऐसा नहीं हुआ और अभी भी
चीनी मिलों पर करोड़ों रुपये किसानों का गन्ना मूल्य बकाया है।
जिला
गन्ना अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीमकोर्ट के
निर्देशानुसार सभी चीनी मिलों को कुल बकाया गन्ना भुगतान में 25 फीसदी
भुगतान 15 जून तक और शेष 75 फीसदी भुगतान 15 जुलाई तक किसानों को करना है।
जिला गन्ना अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि चीनी मिलों द्वारा भुगतान किया
जा रहा है और उम्मीद है कि 15 जुलाई तक शत-प्रतिशत भुगतान हो जाएगा।