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मुफ्त की जांच के लिए 800 रुपये का खर्च

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हरदोई। जनपद के मरीजों को सरकार की तरफ से मिलने वाली अल्ट्रासाउंड की मुफ्त जांच सुविधा के लिए निजी पैथोलाजी में छह से आठ सौ रुपये देने पड़ रहे हैं।
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जिला पुरुष व महिला अस्पताल में एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट है। वहीं दोनों अस्पतालों के डॉक्टर हर सप्ताह करीब 600 मरीजों के पर्चे पर अल्ट्रासाउंड की जांच लिख रहे हैं।
दोनों अस्पतालों सिर्फ 250 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पा रहा है। ऐसे में 60 फीसदी मरीजों को निजी पैथोलॉजी से जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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जिला पुरुष अस्पताल में एक वर्ष पहले अल्ट्रासाउंड जांच बंद कर महिला अस्पताल में शुरू कराया गया था। इसके बाद से पुरुष अस्पताल के मरीजों को भी यहां पर ही अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जाने लगा।
अब दोनों अस्पतालों से रोजाना तकरीबन 100 मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए डॉक्टर पर्चा लिख रहे हैं। खास बात यह है कि यहां पर रोज सिर्फ 40 से 45 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है।
ऐसे में 60 फीसदी मरीजों को निजी पैथोलॉजी में सरकार के मुफ्त की सुविधा के लिए 600 से 800 रुपये फीस देनी पड़ रही है। इसके बाद भी प्रबंधन दोनों अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा चालू नहीं करा रहा, जिससे मरीजों की जेबें ढीली हो रही है।
एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का एक-एक पद है। महिला अस्पताल में कई वर्ष से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। ऐसे में पुरुष अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार को ही दोनों जगह के मरीजों का अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।
गर्भधारण से प्रसव तक अल्ट्रासाउंड की जांच जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार, गर्भधारण से लेकर प्रसव तक लगभग हर महीने अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच होती है।
गर्भ के तीन महीने तक तो पांच जांचें अनिवार्य हैं, उनमें से गर्भधारण, गर्भ की स्थिति, यूरिन, एचआईवी, आरएच फैक्टर और बायोकेमिस्ट्री जांच के बिना इलाज आगे नहीं बढ़ता है। बताया कि अल्ट्रासाउंड न होने से गर्भ में पल रहे नवजात की स्थिति पता नहीं चलता।
दो बार आए, पर नहीं हुआ अल्ट्रासाउंड
सांडी ब्लॉक के ग्राम ज्ञानपुरवा निवासी शिखा बुधवार को अस्पताल पहुंचीं थी। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले यहां जांच कराने आईं थी, तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने की बात पर्चे पर लिखी थी।
इसके बाद से दो बार आ चुकी हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से जांच नहीं हो सकी। अब मजबूरी में निजी पैथोलाजी में अल्ट्रासाउंड कराने जाना पड़ रहा है।
गोपामऊ निवासी शमां परवीन ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने 30 किलोमीटर दूर से आना पड़ा है। जब कक्ष में पहुंची तो बताया गया कि अगले दिन आना।
उन्होंने बताया कि करीब 45 लोगों के पर्चे पहले ही जमा हो चुके हैं, अब अगले दिन आना। बावन ब्लॉक के ग्राम त्योरा निवासी आरती और हरियावां ब्लॉक के ग्राम मवैया निवासी गुड्डी ने बताया कि बृहस्पतिवार को बताया गया कि आज सिर्फ पुरुषों का अल्ट्रा साउंड होगा। अगले दिन आना।
एक रेडियोलॉजिस्ट को दो अस्पतालों के मरीजों का अल्ट्रासाउंड करना पड़ रहा है।
प्रयास रहता है कि सभी मरीजों की जांच हो जाए। निजी पैथोलॉजी में अल्ट्रासाउंड कराने से संबंधित किसी मरीज ने मुझसे शिकायत नहीं की है। महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।
- डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
जेडी ने किया सीएचसी का निरीक्षण
माधौगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण यतींद्र पाठक ने डाटा वेलिडेशन आडिट किया। आडिट में एक मरीज इमरजेंसी भर्ती में अधिक पाया गया।
अस्पताल में बृहस्पतिवार को लखनऊ मंडल के संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण ने टीम के साथ ऑनलाइन रिपोर्ट को ऑफलाइन रिकॉर्ड से मिलान किया। इसमें एक अधिक मरीज मिलने से अधीक्षक डॉ. संजय कुमार से अगली बार ऐसा न होने के निर्देश दिए।
जांच में टीम ने टीकाकरण, ओपीडी, भर्ती मरीज, इमरजेंसी कक्ष के उपकरणों का निरीक्षण किया। भर्ती होने पर दवाओं की जानकारी ली, प्रसव कक्ष का निरीक्षण कर संतुष्ट रहे।
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वहीं साफ सफाई और अधिक रखने की हिदायत दी। अस्पताल के अभिलेखों का निरीक्षण किया। इस मौके पर डॉ. अरुण, डॉ. मोहन, डॉ. प्रशांत तिवारी, उत्तम, वकील अहमद आदि रहे।
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