आजादी हासिल हुए 68 साल पूरे हो चुके हैं। 15 अगस्त
का दिन हर साल हमें उन गुजरे दिनों अंग्रेजी हुकूमत से जूझते देश के सपूतों
की याद दिलाता है। इसी के साथ उन सबकी आंखें भी नम हो जाती हैं, जो इन
मंजरों के समीप से प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं।
बुजुर्गों और सेनानियों का
साफ तौर पर कहना है कि स्वतंत्रता दिवस का उत्सव हर्षोल्लास के साथ अवश्य
मनाएं, पर इस स्वतंत्रता को दिलाने वालों की कुर्बानियां अवश्य ध्यान में
रखें। जिले में न तो देश के नाम पर कुर्बान होने वाले सपूतों की ही कोई कमी
रही है और न ही महात्मा गांधी के आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले
स्वतंत्रता सेनानियों की।
इन सेनानियों की सूची में सेनानी भोला सिंह, राम
भरोसे आर्य आज भी मौजूद हैं। उनका कहना है कि भारत मां के लिए जज्बा न तो
भारत में कभी भी कम हुआ है और न ही होगा। आगे भी अपनी धरती मां को वहीं
पुराना सम्मान अपने बेटों से मिलता रहेगा।
उनका कहना है कि दुख की बात
यह है कि आज की युवा पीढ़ी नशे, भ्रष्टाचार आदि में लिप्त है, जिससे उनका
भविष्य क्या होगा और उसके बाद देश का भविष्य क्या होगा, पता नहीं। इसके साथ
ही स्वतंत्रता दिवस को मनाने और इस दिन शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों को
याद करने के बजाए छुट्टी मनाई जाती है, जो शायद ठीक नहीं लगता।
स्वतंत्रता
सेनानी भोला सिंह, राम भरोसे आर्य का कहना है कि युवा पीढ़ी से उनका यही
कहना है कि दिवस पर पूर्णतया छुट्टी न मनाए कुर्बानियों को जरूर याद करें।