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इल्म हासिल करना फर्ज, अमल करना जरूरी: मौलाना

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पिहानी क्षेत्र के मोहल्ला यूसुफजई स्थित जामिया उम्मुल मोमिनीन हजरत खदीजतुल कुबरा लिलबनात में बुखारी शरीफ (हदीस) मुकम्मल होने पर छात्राओं को आलिमा की उपाधि से नवाजा गया। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद मौलाना असजद मियां ने कहा कि यहां से मिली दीनी शिक्षा के मुताबिक बच्चियां अपनी जिंदगी गुजारें और दूसरों के लिए नजीर बनें।
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बुधवार की शाम मदरसे की छात्राओं आफरीन, सादिया खातून, गुलफ्शां खातून व उमैमा खातून को हदीस का आखिरी सबक पढ़ाते हुए मोहम्मदी खीरी के इदारा-ए-महमूदिया के प्रबंधक, जामा मस्जिद के इमाम व जमीयत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना इस्लामुल हक असजद मियां ने कहा कि अल्लाह के हुक्म के मुताबिक जिंदगी गुजारना ही बंदगी है।

हजरत मोहम्मद साहब ने बंदगी के कुछ तरीके फर्ज बताए हैं, इनमें नमाज पढ़ना, रोजा रखना, जकात देना और हज करना शामिल है। कहा कि इल्म हासिल करना फर्ज है, इल्म पर अमल करना भी जरूरी। दुनिया अमल करने की जगह है। इसका फल आखिरत में मिलेगा।
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कहा कि दो कलमे ऐसे हैं जो कहने में आसान, लेकिन तराजू में वजनी होंगे। उन कलमों को पढ़ते रहें।

यहां इमाम ईदगाह मौलाना उस्मान गनी मजाहिरी, हाफिज अबरार, मौलाना अब्दुर्रशीद कासमी, हाफिज सलीमुल्लाह, मौलाना अजमत, मुफ्ती नजीब कासमी, मौलाना अताउल्लाह कासमी, हाफिज अब्दुल हमीद, मौलाना साबिर, मुंशी इकबाल, मौलाना जइमुल इस्लाम, कारी अल्ताफ व हाफिज रेहान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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इल्म हासिल करना फर्ज और अमल करना जरूरी: मौलाना

बुधवार की शाम मदरसे में आयोजित हुआ कार्यक्रम
बुखारी शरीफ मुकम्मल होने पर छात्राओं को दी गई आलिमा की उपाधि
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