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नहीं लिया 500 के नोट, नर्सिंग होम में रखी रही लाश

Thu, 10 Nov 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
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अनीता का पति उमेश कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। शहर के निर्मला नर्सिंग होम के संचालक ने बुधवार को संवेदनहीनता की सभी सीमाएं पार कर दी। बिल भुगतान को तैयार मृत नवजात के पिता को उसकी लाश तक नहीं दी। पिता के पास 500 रुपये के नोट थे, उसने रुपये दिए लेकिन संचालक नहीं माना। परिजनों के हंगामा करने पर एएसपी नर्सिंग होम पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी। तब जाकर संचालक ने 500 रुपये के नोट जमा करवाए और प्रसूता को डिस्चार्ज करने के साथ नवजात की लाश पिता को सौंप दी। 
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भरखनी ब्लाक के भइलामऊ निवासी उमेश ने गर्भवती पत्नी अनीता को मंगलवार को नघेटा रोड स्थित निर्मला नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। अनीता ने बुधवार दोपहर एक बेटी को जन्म दिया। कुछ घंटे बाद बच्ची की मौत हो गई। उमेश ने बताया कि पत्नी को डिस्चार्ज कराने के लिए उसने करीब चार बजे बिल बनवाया। काउंटर से उसे 12 हजार रुपये का बिल दिया गया। उमेश ने 500 रुपये के तीन नोट काउंटर पर दिए। नर्सिंग होम संचालक ने पांच सौ के नोट लेने से इंकार क र दिया।   उमेश ने कहा कि पत्नी को भर्ती रहने दो और बेटी की लाश दे दो लेकिन संचालक तैयार नहीं हुआ। बच्ची की लाश एक दिन अस्पताल में रही। गुरुवार को उमेश ने नए छोटों नोट और नए नोटों के लिए प्रयास किया लेकिन व्यवस्था नहीं बनी। दोपहर करीब 12 बजे वह फिर नर्सिंग होम पहुंचा और नोट न मिलने की बात कह बेटी की लाश देने की गुजारिश की, लेकिन संचालक नहीं पसीजा। इस पर उमेश के साथ आए लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर एएसपी पूर्बी बीसी दुबे कोतवाली पुलिस के साथ नर्सिंग होम पहुंचे।
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एएसपी ने लाश न देने पर रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी। इस पर नर्सिंग होम संचालक ने 500 के नोट जमा करवा लिए और शव देने के साथ अनीता को भी डिस्चार्ज कर दिया। करीब 20 घंटे तक नवजात की लाश अस्पतालमें ही रखी रही। नर्सिंग होम संचालक आरपी गुप्ता ने कहा कि अनीत की तबियत ठीक नहीं इसलिए डिस्टचार्ज नहीं किया था। परिजनों ने नवजात की लाश मांगी ही नहीं थी।  
 500 व 1000 रुपये के नोट न चलने से मेडिकल स्टोर व नर्सिंग होम में गुरुवार को भी मरीज व तीमारदार परेशान हुए। बुखार से पीड़ित पत्नी सुमित्रा को सांडी ब्लाक के कोइला गांव निवासी राजेश ने बुधवार को कटियार नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। गुरुवार को राजेश मेडिकल पर दवा लेने गया। दवा 320 रुपये की हुई थी। उसने पांच सौ रुपये का नोट दिया। मेडिकल स्टोर संचालक ने नोट लेने से इंकार करते हुए दवा वापस ले ली। इसके बाद राजेश ने अपने एक मिलने वाले से रुपये उधार लिए और दवा ली।   पिहानी कस्बा निवासी रूपराम ने पत्नी रामदेवी क ी कटियार नर्सिंग होम में जांच कराई थी। पर्चे पर लिखी दवा लेने के बाद पांच सौ का नोट दिया। मेडिकल स्टोर संचालक ने दवा रख ली और सौ के नोट लाने क ो कहा। रुपये खुल्ले न हो पाने के कारण वह बिना दवा लिए ही लौट गए। रामचंद्र के बेटे संतोष को आंत में परेशानी थी। रमचंद्र ने रानी साहिब कटियारी अस्पताल में उसकी जांच कराई थी। जांच के बाद लिखी गई दवा मेडिकल पर लेक र पांच सौ का नोट दिया। दवा 270 रुपये की हुई थी। इसके चलते मेडिकल स्टोर संचालक ने दवा नहीं दी। इसके चलते उन्होंने अपने एक मिलने वाले से रुपये उधार लिए। भरखनी ब्लाक के रामापुर गांव निवासी रत्नेश गुरुवार को पत्न्ी उमा का इलाज कराने बालाजी अस्पताल आए थे। डाक्टर की फीस व जांच में सौ के नोट समाप्त हो गए। जबकि दवा लेने के लिए पांच सौ के नोट ही बचे थे। दवाखाने पर पांच सौ के नोट लेने से इंकार कर दिया गया। अन्य कोई व्यवस्था न होने के कारण वह वापस चले गए।
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