पंचायत चुनाव के मतदान को निष्पक्ष कराने के लिए अबकी
बाहरी तत्वों पर खासी निगाह रखने के निर्देश दिए गए हैं। यही नहीं जिले के
जो मतदाता नहीं हैं, उनको मतदान के 48 घंटे पूर्व जिले को छोड़ देने के
निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अन्यथा की स्थिति में चले अभियान में यदि
पकड़े गए तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डीएम रमेश मिश्र
ने भी इस ओर सभी एसडीएम और सीओ को आयोग के निर्देशों से अवगत कराते हुए
बताया कि मतदान के दिन अपने सगे संबंधियों को चुनाव लड़ाने के लिए बाहरी
जिलों के लोग यहां शक्ति प्रदर्शन न करें और न ही चुनाव को शांतिपूर्ण
संपन्न होने में दखल दें, इसको लेकर बाहरी जिलों के लोगों को मतदान के दिन
जिले में न रहने दिया जाए।
48 घंटे पूर्व वह सभी जो इस जिले के मतदाता न
हों, सीमा लांघ जाने के निर्देश दे दिए गए हैं। अन्यथा की स्थिति में अपने
अपने क्षेत्रों में अभियान चलाया जाए और जो पकड़ में आ जाएं, उनके खिलाफ
कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डीएम ने कहा कि सभी एसडीएम को आचार संहिता का
पालन कड़ाई से कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।
उसका पालन न करने वालों पर
कार्रवाई होगी। उधर, जिला पंचायत सदस्य पद के नामांकन को लेकर नामांकन
पत्रों की बिक्री दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रही। इस दिन आरक्षित वर्ग के
164 एवं अनारक्षित वर्ग के 21 नामांकन पत्र बिके। मल्लावां प्रथम से पूर्व
सपा जिलाध्यक्ष राजेश यादव की पत्नी ममता यादव व कप्तान सिंह की पत्नी ने
भी नामांकन पत्र खरीदा।
शनिवार को भी लोकवाणी के कक्ष में नामांकन पत्रों
की बिक्री जारी रही। भीड़ भाड़ होने के बाद भी नाजिर संजय गुप्ता की टीम ने
व्यवस्था संभाली। उनके नेतृत्व में देवेंद्र सिंह व धर्मवीर ने नामांकन
पत्रों की बिक्री की। नाजिर ने बताया कि रविवार को भी नामांकन पत्रों की
बिक्री की जाएगी।
उधर, आयोग के निर्देशों को यदि सख्ती से लागू कराया गया
तो कम से कम अगले 40 दिनों तक सत्ताधारी नेताओं का जलवा नहीं दिखेगा। आचार
संहिता ने सरकारी डाक बंगलों में भी उनके बेरोकटोक उपयोग पर भी लगाम लगा
दी है। निर्धारित समय सारणी के अनुसार जिले में चार चरणों में पंचायत चुनाव
होने हैं।
जिसके चलते जिला निर्वाचन अधिकारी रमेश मिश्र द्वारा शहर समेत
ग्रामीण क्षेत्रों में धारा 144 लागू करते हुए आचार संहिता का पालन कराने
के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। चार चरणों में चुनाव होने के बाद मतगणना एक
साथ एक नवंबर को होगी। आचार संहिता मतगणना की समाप्ति तक जारी रहेगी।
जिसको लेकर लगभग 40 दिन सत्ता का नहीं आचार संहिता का जलवा चलेगा। आदर्श
संहिता में सत्ताधारी दल को सार्वजनिक उपक्रम, शासकीय, अर्द्ध शासकीय विभाग
के निरीक्षण गृह, डाक बंगलों और किसी विश्रामगृह का इस्तेमाल चुनाव प्रचार
या चुनाव कार्यालय के रूप में नहीं करेंगे।
इसके अलावा सत्ताधारी दल
के मंत्री शासकीय दौरों को निर्वाचन से संबंधित प्रचार कार्य से नहीं
जोड़ेंगे और न ही निर्वाचन के दौरान प्रचार करते हुए शासकीय तंत्र या
कर्मियों का उपयोग भी कर सकेंगे। डीएम ने आचार संहिता के बिंदु बताते हुए
सरकारी और अर्द्ध सरकारी वाहनों, तंत्र व कर्मियों का सत्ताधारी दल के हित
को बढ़ावा देने के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।