अचानक खराब हुए मौसम के मूड से शुरू हुई रिमझिम बारिश
से कम ज्यादा खुशी कम के हालात बन गए। बारिश से जहां गेहूं और गन्ना
किसानों के लिए पानी की जरूरत तो पूरी हुई, मगर बारिश के साथ चली तेज हवाओं
से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल तथा सरसों की फसल तमाम स्थानों पर पलट
दिया।
इससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जबकि आलू, तोरया, सरसों
एवं टमाटर का उत्पादन करने वाले किसानों के चेहरे काफी फीके रहे। खेत
खलिहानों में इस समय आलू, गन्ना और गेहूं आदि की फसलें खड़ी तो सरसो,
टमाटर, तोरया की फसलें कट रही है।
ऐसे में पिछेती गेहूं और गन्ना में पानी
लगाने की पूर्ति हो गई तो आलू, सरसों आदि को नुकसान की संभावना है। रविवार
को जिले में करीब 41 मिमी बरसात हुई, जिससे पारा गिरने के साथ ही ठंड ने
पलटी मार दी। जानकारों का कहना है कि अगर बारिश का सिलसिला आगे और बढ़ा तो
आलू, सरसों आदि का चौपट होना तय है।
पिछले साल भी इसी समय लगातार हुई बारिश
ने आलू को काफी नुकसान पहुंचाया था। उधर, शनिवार की देर रात बिगड़े मौसम
के मिजाज रविवार को भी कड़क रहे। रात में हुई बारिश के बाद रविबार सुबह भी
बादल बरसने लगे और थोड़ी ही देर में ापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों
की ठंड की वापसी से कंपकंपी छूट गई।
बारिश से वातावरण में नमी के साथ
ही तापमान में गिरावट दर्ज की र्गई। मौसम वेधशाला के प्रभारी जयशंकर मिश्र
ने बताया कि मौसम के बदले मिजाज से तापमान में गिरावट हुई तथा लोगों ने ठंड
का अहसास किया। उन्होंने बताया कि मौसम के मिजाज लगातार बदल रहे हैं, ऐसे
में बारिश जारी रह सकती हैं।
आज तापमान का अधिकतम स्तर 18.0 एवं न्यूनतम
15.0 डिग्री सेल्सियस रहा। उधर, बारिश से जहां गल्लामंडी में जलभराव हुआ,
वहीं अनाज के बोरे भीग गए। इसको लेकर किसान और व्यापारी परेशान रहे। उधर,
शहर की ऐतिहासिक रामलीला के मैदान पर बारिश से रपट बनने से दुकानदारी
प्रभावित हुई।
बारिश से हुए कीचड़ और रपट के कारण मेला प्रभावित रहा। ज्ञात
हो कि बीते कुछ दिनों से पारा चढ़ने से सर्दी काफी कम हो गई थी और लोगों
ने गर्म कपड़े रख दिए थे।