संडीला। सिंथेटिक दूध के काले कारोबार में अच्छी कमाई की वजह से ही संचालक 11 माह जेल की हवा खाने के बाद जब बाहर निकला तो उसने फिर यह काम शुरू कर दिया। 25 किलोग्राम पाउडर में रिफाइंड ऑयल व सार्विटाल मिलाकर करीब 265 लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया जाता था। स्थानीय बाजार इस दूध की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर मिल रही थी। यानी 265 लीटर दूध 13250 रुपये में बेचा जा रहा था। जबकि लागत 5600 रुपये के करीब आती थी। ढाई गुना से ज्यादा का मुनाफा होने के कारण ही यह धंधा खूब फल-फूल रहा था।
सिंथेटिक दूध का काला धंधा संडीला औद्योगिक क्षेत्र में वर्ष 2018 में सामने आया था। यहां दुर्गा इंटर प्राइजेज नाम से फर्म का संचालन पार्टनरशिप में होता। उस समय इसके पार्टनर रहे लखनऊ के मोहल्ला जानकीपुरम निवासी नवीन मिश्रा और उसका भाई योगेश मिश्रा आदि हुआ करते थे। 16 फरवरी 2018 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की सहायक आयुक्त शशि पांडेय के नेतृत्व में टीम ने छापा मारकर 27 हजार लीटर सिंथेटिक दूध और सामग्री बरामद की थी।
सिंथेटिक दूध के कारोबार में पांच साल पहले इस फर्म का लाइसेंस निलंबित हुआ था। फर्म के बंद होने के बाद नवीन मिश्रा ने प्रोपराइटरशिप में अभिषेक डेयरी के नाम फर्म बना ली और सिंथेटिक दूध के कारोबार को शुरू कर दिया। वर्ष 2018 में पकड़े गए दूध में मिलावट की पुष्टि हुई थी। इसके बाद खाद्य विभाग ने कई गोदामों पर छापा मारा था। बड़ी मात्रा में दूध पाउडर, यूरिया, रिफाइंड ऑयल आदि बरामद हुआ था। इसको नष्ट करवा दिया गया था। 17 फरवरी 2018 को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत केमिकल पदार्थों के प्रयोग से दूध बनाने व सरकारी कार्य में बाधा और तथ्यों से छेड़छाड़ में नवीन मिश्रा व उसके भाई योगेश मिश्रा आदि के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
विवेचना में संडीला के ज्ञानेंद्र यादव, सरायमरूफ़पुर के रामकिशुन का नाम भी आया था। 22 अप्रैल 2018 को हरदोई कोर्ट में एक मामले में आए नवीन मिश्रा व योगेश मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सिंथेटिक दूध के विक्रय व कारोबार में एडीएम कोर्ट ने 69 लाख का जुर्माना लगाया था। उस समय एसडीएम रहे आशीष सिंह ने संचालक के सभी बैंक खातों को सीज कर दिया था। बिजली कनेक्शन, जीएसटी पंजीकरण निरस्त किया गया था। जेल से जुलाई 2019 में जमानत पर आने के बाद नवीन मिश्रा ने दोबारा से मेसर्स अभिषेक डेयरी के नाम से लाइसेंस बनवा लिया और सिंथेटिक दूध का काम शुरू कर दिया।