जिला अस्पताल में बीस दिन से मरीज और उनके तीमारदार
बाहर से सामग्री लाकर प्लास्टर करा रहे हैं, पर उनकी सुध लेने वाला कोई
नहीं है। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। वहीं विभागीय
जिम्मेदार कागजी कार्रवाई करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैैं।
ज्ञात
हो कि हड्डी टूटने के बाद जिला अस्पताल में प्लास्टर का न्यूनतम शुल्क
निर्धारित है। उसी के आधार पर मरीजाें का प्लास्टर किया जाता है, पर विगत
बीस दिन से अस्पताल में प्लास्टर कराना निजी चिकित्सक से भी ज्यादा महंगा
पड़ा रहा है।
मरीजों के तीमारदारों को बाहर से सामग्री लगाकर प्लास्टर
कराना पड़ रहा, पर जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे सबसे
ज्यादा परेशान गरीब तबके के लोगों को हो रही है, जबकि प्रदेश सरकार
नि:शुल्क बेहतर चिकित्सा मुहैया कराने का दावा कर रही है।
इससे मरीज व
तीमारदार परेशान हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। शुक्रवार को भी हड्डी
विभाग का कुछ ऐसा ही नजारा था। मरीज के तीमारदार बाहर से खरीद कर
प्लास्टर आफ पेरिस ला रहे थे, तब कहीं जाकर उनका प्लास्टर हो पा रहा था और
जो नहीं ला पा रहे थे, उनको बैरंग लौटना पड़ रहा था।
उधर, जिला अस्पताल में
एक्सरे के लिए जनरेटर की सुविधा मुहैया है, पर इन दिनों अस्पताल के जनरेटर
शो पीस बने हुए हैं। इससे एक्सरे विभाग में एक्सरे कराना भी मुश्किल हो
रहा है। एक्सरे विभाग में मारपीट के एक्सरे और उनकी रिपोर्ट लगाने में
डॉक्टर और कर्मी ज्यादा सक्रिय रहते हैं।
आम मरीजों को एक्सरे के लिए घंटों
इंतजार करना पड़ता है। एक्सरे विभाग में 12 बजे तक पर्चे जमा करने का नियम
है, इसके बाद भी 11 बजे से ही पर्चे जमा होना बंद हो जाता है। इससे लोगों
को बाहर से एक्सरे कराना पड़ रहा है।
उधर, इस बाबत सीएमएस डा. आरके
मिश्र ने बताया कि उनको प्लास्टर आफ पेरिस के खत्म होने की जानकारी नहीं
है। बताया कि एक माह पूर्व ही प्लास्टर आफ पेरिस का आर्डर दिया जा चुका है।
वह जल्द ही इसकी व्यवस्था कराएंगे। कहा कि जनरेटर के लिए भी बजट की मांग
की गई है।