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Hardoi News: 17,000 महिलाएं सम्मान के साथ लिख रहीं स्वर्णिम अध्याय

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फोटो-27- स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं। संवाद
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भरावन। ब्लॉक की 65 ग्राम पंचायतों की 17,000 महिलाएं 1,370 समूहों से जुड़कर स्वर्णिम अध्याय लिख रही हैं। महिलाएं परिवार को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। महिलाओं ने पति की मेहनत देखकर घर के बाहर कदम निकाला और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सूप, डलिया, आलू चिप्स, हल्दी, धनिया, मिर्च मसाला, ड्रैगन फ्रूट, गेंदा फूल आदि की खेती के साथ ही आटा चक्की, पशुपालन, परचून दुकान कर परिवार को समृद्ध बनाने का काम किया है। गांवों में ताने सुने फिर भी महिलाएं पीछे नहीं हटीं। अब तरक्की की इबारत लिखते हुए कमजोर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
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पहले गांव, अब ब्लॉकों में समूह का कर रहीं गठन
मझिगवां शिवपुरी निवासी रीता शुक्ला के पति रामकिशोर की नौ वर्ष पहले मौत हो चुकी है। पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक कमजोरी को देखकर रीता ने परिवार को मजबूती देने का मन बनाया। विजय लक्ष्मी आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन किया। कमजोर तबके की महिलाओं को जोड़कर समूह से ऋण दिलाकर समृद्धि के रास्ते पर कदम बढ़ाया। बेहतर कार्य को देखकर आईसीआरपी ने रीता का चयन कर समूह के गठन की जिम्मेदारी सौंपी। वह ब्लॉक भरावन के साथ-साथ कोथावां, संडीला, बेहंदर में समूहों का गठन कर रही हैं। उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से उन्हें 12,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय भी मिलता है।

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आंगनबाड़ी से लेकर परिवारों को दे रहीं मसाले का चटखारा
मसाले का स्वाद अब आम जनमानस की पहली पसंद बन चुकी है। पीपरगांव नेवादा की रहने वाली पूनम देवी ने समय के चक्र को देखते हुए परिवार को मजबूती देने के लिए खाटू श्याम बाबा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मसाला चक्की लगाई। तैयार मसालों की दुकानों के साथ-साथ टीएचआर प्लांट में भी सप्लाई कर रही हैं। पूनम अपने पति शैलेंद्र का साथ लेकर लोगों को मसाले का चटखारा दे रही हैं। बताया कि दुकानों पर मसाला सप्लाई करने से प्रतिमाह 15,000 रुपये की बचत हो रही है।
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नैतिक कार्य कर ग्रामीणों के लिए बनीं प्रेरणा
भरावन ब्लॉक का दाखिलौल गांव कच्ची शराब बनाने का हब माना जाता था। इसी गांव की रहने वाली अंजू को पति की मौत के बाद कुछ लोगों ने कच्ची शराब बनाने की सलाह दी थी लेकिन अंजू ने अनैतिक कार्य की तरफ झुकाव न कर शनिदेव आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांव में परचून की बड़ी दुकान संचालित की। बताया कि अब करीब 10 हजार रुपये की माह में बचत कर रही हैं।
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कोटेदार बन ग्रामीणों की कर रहीं सेवा
भरावन की ग्राम पंचायत हड़हा की सरोजनी देवी ने कमल आजीविका स्वयं सहायता समूह बनाकर गांव की महिलाओं को जोड़ते हुए मत्स्य पालन, भैंस पालन करवाया। समूह के माध्यम से 50,000 रुपये का ऋण लेकर गांव की सरोजनी कोटेदार बन गई हैं। ग्रामीणों की मदद करने के साथ-साथ महिलाओं को अग्रसर करने के लिए हमेशा प्रयास करती हैं।
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महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ने के लिए गांव-गांव बैठकें की जा रही हैं। भरावन की 17,000 महिलाएं 1,370 समूहों से जुड़कर बेहतर कार्य कर रही हैं। महिलाओं को समूह के माध्यम से ऋण भी दिलाया जा रहा है। -सपना शुक्ला, ब्लॉक मिशन प्रबंधक

फोटो-27- स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं। संवाद

फोटो-27- स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं। संवाद

फोटो-27- स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं। संवाद

फोटो-27- स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं। संवाद

फोटो-27- स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं। संवाद

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