हरदोई। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण के लिए जारी बजट में 35 लाख रुपये के गोलमाल के मामले में ग्राम प्रधान और आरोपी सचिवों के विरुद्ध डीएम के निर्देश के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है। बावन के खंड विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के बीच उक्त प्रकरण को लेकर तनातनी की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि सत्ताधारी दल के एक जनप्रतिनिधि के दबाव में बीडीओ और डीपीआरओ कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
बावन विकास खंड की ग्राम पंचायत बरखेरा में शौचालयों के निर्माण में गोलमाल की शिकायत पर डीएम पुलकित खरे ने जांच के निर्देश दिए थे। इस पर डीपीआरओ आलोक कुमार सिन्हा ने जांच कमेटी गठित कर सत्यापन कराया था। 35 लाख रुपये के गोलमाल की पुष्टि जांच में हुई थी। डीएम पुलकित खरे ने पूरे मामले में ग्राम प्रधान नरेशपाल सिंह, ग्राम सचिव रहीं आकांक्षा सिंह, रिजवान अली और नरेंद्र द्विवेदी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने और रिकवरी कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने बावन के बीडीओ आलोक कुमार को पत्र जारी कर एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखा था, लेकिन डीएम के आदेश सात दिन बीतने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। इस बारे में बीडीओ बावन अतुल कुमार ने कहा कि प्रधान और सचिव पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए डीपीआरओ खुद सक्षम हैं। शौचालय निर्माण का बजट डीपीआरओ ने जारी किया है, उन्हें ही रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। उधर दूसरी ओर डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने बताया कि ऐसे मामलों में एडीओ पंचायत एफआईआर दर्ज कराते हैं, लेकिन इस प्रकरण में एडीओ पंचायत नरेंद्र द्विवेदी भी आरोपी हैं। इसके चलते एडीओ से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जा सकती है। बीडीओ लिखित रूप से अगर कुछ देंगे तो एफआईआर दर्ज कराने के लिए दूसरा तरीका निकाला जाएगा।
ग्राम प्रधान डीएम से मिले, मांगी 15 दिन की मोहलत
पंचायत राज विभाग से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आरोपी ग्राम प्रधान नरेशपाल सिंह ने अपना पक्ष रखने के लिए जिलाधिकारी पुलकित खरे से मुलाकात की थी। ग्राम प्रधान ने 15 दिन का समय शौचालयों का निर्माण पूरा करने के लिए मांगा है। साथ ही शिकायत और कार्रवाई के लिए अपने एक पारिवारिक सदस्य को ही जिम्मेदार बताया है। हालांकि डीपीआरओ आलोक सिन्हा का कहना है कि शिकायत मिली, उस पर जांच हुई और 35 लाख रुपये की अनियमितता पाई गई है। ऐसे में अब समय दिए जाने का कोई मतलब नहीं है।
बचाव में आगे आए सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि
आरोपी ग्राम प्रधान नरेश पाल सिंह को एफआईआर से बचाने के लिए दूसरा दल छोड़कर भाजपा में आए एक जनप्रतिनिधि ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। माना यह जा रहा है कि उक्त जनप्रतिनिधि के चलते ही प्रशासनिक अधिकारी भी दबाव में हैं और ग्राम प्रधान के विरुद्ध एफआईआर नहीं करा रहे हैं। उधर दूसरी ओर मामले में आरोपी बनाए गए तीन में से दो सरकारी कर्मचारियों का निलंबन भी हो चुका है।