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Hardoi News: स्वास्थ्य सुविधाओं पर 20 दिन में 1.40 करोड़ खर्च, व्यवस्थाएं फिर भी नहीं बेहतर

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हरदोई। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य की बुनियादी सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सीएचसी व पीएचसी पर व्यवस्थाएं जस की तस हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर मामूली रोगों की दवाएं देकर मरीजों को चलता कर दिया जाता है, जबकि गंभीर घटना व रोग पर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। सीएचसी-पीएचसी पर मरीजों को बेहतर सुविधा तक मयस्सर नहीं है।
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शासन की ओर से गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारी भरकम बजट दिया जाता है। ताकि लोगों को उनके गांव में ही उपचार मिल सके। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले के सभी ब्लॉकों से संबंधित सीएचसी व पीएचसी सहित मेडिकल कॉलेज और 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय को देने के लिए अभी तक 11 करोड़, 72 लाख, 72 हजार, 918 रुपये मिले। इसमें से पांच करोड़, 40 लाख, 32 हजार, 282 रुपये 25 जून तक खर्च कर लिए गए। खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेज और 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय ने अभी आवंटित बजट का एक भी पैसा खर्च नहीं किया।
19 ब्लॉकों में पांच करोड़ से अधिक खर्च हो गए हैं। बीते पांच जून से 25 जून के बीच सवायजपुर को छोड़कर 18 ब्लॉकों ने एक करोड़, 39 लाख, 53 हजार, 561 रुपये खर्च कर दिए हैं। इसमें सबसे अधिक भरावन में छह लाख, 34 हजार, 134 रुपये 20 दिन में खर्च किए गए। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि सिर्फ सर्दी व खांसी की दवा दी जाती है, लेकिन किसी हादसे व रोग में मरीज की हालत गंभीर होती है तो मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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अभी तक सबसे अधिक बावन ने खर्च की धनराशि
हरदोई। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य कार्य व वेतन के लिए दी गई धनराशि में बावन ब्लॉक ने सबसे अधिक धनराशि खर्च की है। बावन ने कुल बजट का 67 प्रतिशत धनराशि का उपभोग कर लिया है। इसके अलावा टोडरपुर ने 58, सांडी ने 55, टड़ियावां ने 53, संडीला ने 52, भरावन ने 51 और अहिरोरी ने 50 प्रतिशत अभी तक मिला बजट प्रयोग कर लिया है। मेडिकल कॉलेज और 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय ने अभी तक धनराशि से कुछ भी खर्च नहीं किया है।



विकास खंडों में बने स्वास्थ्य केंद्राें पर अलग-अलग मदों में धनराशि का आवंटन होता है। राशि कहां और किस मद में खर्च हो रही है। इसका पूरा ब्योरा लिया जाता है। स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्था बेहतर की जा रही हैं। इसकी मॉनिटरिंग हो रही है, कोई अनियमितता करता है तो कार्रवाई की जाती है। -डॉ. धीरेंद्र सिंह, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी
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