कासिमपुर थाना क्षेत्र में एक किसान की फसल बर्बाद
होने के सदमेे में हार्टअटैक पड़ने से मौत हो गई। अब तक पूरे जिले में 17
दिनों के दौरान 14 किसानों की मौत हो चुकी है। उधर, सूबे की सरकार भले ही
350 किसानों की मौत का कारण खुदकुशी या सदमा मान रही हो, पर जिला प्रशासन
जांच पड़ताल में किसानों की मौत की वजह बीमारी ही बता रहा है।
हैरत की बात
है कि संकट से जूझ रहे इन किसानों के बीच जिले के जनप्रतिनिधि भी पहुंचने
की जहमत नहीं उठा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, कासिमपुर थाना
क्षेत्र के गांव सरेहरी निवासी मिश्रीलाल (50) का करीब तीन बीघा खेत है। इस
बार उसने खेत पर गेहूं की फसल तैयार की थी, पर जब फसल पककर तैयार हुई तो
खराब मौसम की भेंट चढ़ गई। बारिश से गेहूं खेत में बिछ गया और फसल में भी
दाना न निकलने पर उसे सदमा लगा।
गुरुवार की देर रात 9 बजे वह घर पहुंचे और
उनकी हालत बिगड़ गई। जब तक परिजन कुछ समझ पाते तब तक उनकी मौत हो गई।
मिश्रीलाल के बेटे उत्तम ने बताया कि पिता पर फसल ऋण का 2 लाख रुपये बकाया
था, जिसके चलते वह परेशान थे। उनकी हृदयगति रुकने से मौत हुई है।
घटना
की सूचना देने के बाद भी जब शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे तक कोई अधिकारी
नहीं पहुंचा तो परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार गांव के एक खेत करवा दिया।
उधर, इस बाबत एसडीएम संजीव सिंह ने बताया कि घटना की जांच कर्रा ली गई।
मृतक दो दिन पहले चंडीगढ़ से आया था।
उसने अपना खेत बटाई पर दे रखा, जिसका
पैसा भी वह पहले ही ले चुका था। उधर, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद
किसान अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। पहले खरीफ की फसल में सूखा पड़ने से
बर्बादी हुई और अब रबी की फसल भी उनकी मुसीबत कम नहीं कर रही है।
ऐसे में
फसली बीमा से जो उम्मीद थी वह भी पूरी होती नजर नहीं आ रही है। बैंक और
साहूकारों के कर्जे में डूबे किसानों की या तो हृदयगति रुकने से मौत हो रही
या फिर वह फांसी लगाने को विवश हैं। इस माह के आंकड़ों पर गौर करें तो 17
दिनों में 14 किसानों ने मौत हो गई।
इनमें 10 किसानाें का हार्ट फेल, दो ने
फांसी और एक ने जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी, पर जिला प्रशासन ने
जांच पड़ताल के बाद दो टूक कह दिया कि मरने वाला बीमार था और उसका उपचार
चल रहा था। इस बात को लेकर किसान संगठन के नेता भी खासे रोष में हैं, पर
जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।