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दिन में कांग्रेसी हुए वीरेंद्र को रात में घोषित किया प्रत्याशी

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हरदोई। कांग्रेस ने हरदोई लोकसभा क्षेत्र से पार्टी के अंदर के दावेदारों को सिरे से खारिज करते हुए शुक्रवार को ही सपा छोड़ पार्टी में शामिल होने वाले पूर्व विधायक वीरेंद्र वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पार्टी के पुराने और वफादार दावेदारों को किनारे किए जाने से कहीं न कहीं पार्टी के अंदर अंसतोष है। इससे पहले मिश्रिख संसदीय क्षेत्र से मंजरी राही को प्रत्याशी घोषित किए जाने का विरोध कांग्रेस कार्यकर्ता कर रहे हैं।
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कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किए गए वीरेंद्र वर्मा 2007 में तत्कालीन अहिरोरी विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बदले परिसीमन में वह बसपा के टिकट पर 2012 और 2017 में सांडी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। 2012 में सपा प्रत्याशी राजेश्वरी से और 2017 में भाजपा प्रत्याशी प्रभाष कुमार से वीरेंद्र वर्मा हार गए थे। गत विधानसभा चुनाव के बाद वह सपा में शामिल हो गए थे। उन्हें हरदोई और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से सपा के टिकट का अहम दावेदार माना जा रहा था। बदली परिस्थितियों में सपा-बसपा के बीच गठबंधन हो गया तो हरदोई की सीट सपा को और मिश्रिख की सीट बसपा को मिली।
हरदोई सीट से सपा ने अपनी पुरानी कार्यकर्ता और तीन बार सांसद रह चुकीं ऊषा वर्मा को ही प्रत्याशी बनाया। इसके बाद से ही वीरेंद्र वर्मा के सपा छोड़ने की अटकलें लग रहीं थीं। बहरहाल इन अटकलों पर विराम शुक्रवार देर शाम लगा। वीरेंद्र वर्मा दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए। शुक्रवार आधी रात के बाद जारी की गई कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची में वीरेंद्र वर्मा को हरदोई लोकसभा क्षेत्र से टिकट दिए जाने की घोषणा की गई। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हरदोई सीट से कांग्रेस के टिकट के लिए 14 दावेदार थे। इनमें से कई दावेदार तो पिछली कई पीढ़ियों से कांग्रेस से ही जुड़े हैं। बावजूद इसके चंद घंटों पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए वीरेंद्र वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।
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यूं तो वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस हरदोई लोकसभा क्षेत्र से मुख्य लड़ाई से बाहर रही है, लेकिन वीरेंद्र वर्मा को प्रत्याशी बनाए जाने से कहीं न कहीं गठबंधन प्रत्याशी के लिए मुसीबत बढ़ेगी। पिछला लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ने वाले सर्वेश जनसेवा अब भाजपा में हैं। उधर दूसरी ओर वीरेंद्र वर्मा अभी तक सपा और बसपा की ही राजनीति करते रहे हैं, ऐसे में जो लोग उनके समर्थक हैं, वह कहीं न कहीं सपा-बसपा से ही जुड़े रहे हैं।
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