माधौगंज (हरदोई)। अन्ना मवेशियों के लिए खोले गए आश्रयस्थलों में न चारा है और न पानी। ऐसे में आश्रय स्थल में तैनात कर्मियों ने टैग लगे मवेशियों को खुला छोड़ दिया है। जो मवेशी आश्रय स्थलों में बंद हैं, वह भूख और प्यास से तड़प रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक 13 मवेशियों की मौत हो चुकी है। जिम्मेदार बजट न होने की बात कह रहे हैं पर सवाल ये उठता है कि मवेशियों की मौत का जिम्मेदार कौन होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पशु आश्रय स्थल विकसित किए गए। माधौगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरहस के मजरा टेड़िया व दौलतयारपुर में भी अस्थायी पशु आश्रय स्थल विकसित किए गए। यहां दो शिफ्टों के लिए पांच-पांच सफाई कर्मियों की तैनाती भी की गई। मंगलवार को बरहस के आश्रय स्थल पर कर्मी रामपाल मौजूद मिला। वह अनुपस्थित कर्मियों के बारे में जानकारी नहीं दे सका। बताया कि आश्रय स्थल में ऑन रिकार्ड 165 मवेशी हैं, जबकि मौके पर मात्र 70 मवेशी मिले। ग्रामीणों ने बताया कि आश्रय स्थल पर कर्मी नियमित ड्यूटी नहीं देते हैं। यहां मवेशियों के लिए चारे और पानी का कोई प्रबंध नहीं है। देखरेख के अभाव में अब तक यहां लाए गए मवेशियों में से 12 की मौत हो चुकी है। मवेशियों को भूख व प्यास से बिलबिलाता देखकर कर्मियों ने उन्हें खुला छोड़ दिया है।
वहीं दौलतयारपुर में बनाए गए आश्रय स्थल में भी चारे और पानी की व्यवस्था नहीं मिली। आश्रय स्थल में अभिलेखों में दर्ज 135 में से मात्र 55 मवेशी ही मिले। ग्रामीणों ने बताया कि चारे और पानी के अभाव में मवेशी बेहाल है। पीने के पानी के लिए परिसर में तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया था, लेकिन ये सूखा पड़ा है। रविवार को यहां गाय की मौत हो गई थी। उसकी बछिया को ग्रामीण पाल रहे हैं। यहां बना टिन शेड भी निष्प्रयोज्य नजर आया। ड्यूटी पर मौजूद सफाई कर्मी दिनेशपाल ने बताया कि अन्य सफाईकर्मियों की चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई है। प्रधानपति रामकुमार ने बताया कि सरकार से अब तक आश्रय स्थल के संचालन करने के लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है। अब तक जो भी इंतजाम किए गए हैं वह निजी संसाधनों से किए गए हैं। बीडीओ प्रमोद सिंह चंदेल ने बताया कि चारे के लिए बजट की डिमांड भेजी गई है, बजट मिलते ही इंतजाम दुरुस्त किए जाएंगे।