हरदोई। लोनार कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत हरदोई-सवायजपुर मार्ग पर ग्राम नकटौरा के निकट टायर फटने से अनियंत्रित हुई ट्रैक्टर ट्राली ने विपरीत दिशा से आ रहे बाइक सवार डॉक्टर को चपेट में ले लिया। ट्राली में बाइक फंस गई और सड़क किनारे खाई में जा गिरी। हादसे में चिकित्सक की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रैक्टर चालक फरार हो गया।
पाली थाना क्षेत्र के ग्राम सहजनपुर निवासी डॉक्टर शिशिर मिश्रा उर्फ मृदुल (35) पुत्र डा. अरुण मिश्र शहर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में कार्यरत थे। उनकी पत्नी और बच्चे मोहल्ला सुभाष नगर में रहते हैं। बुधवार सुबह छह बजे डा. शिशिर हरदोई जाने के लिए गांव से बाइक से निकले थे। रास्ते में हरदोई-सवायजपुर मार्ग पर लोनार कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत नकटौरा के पास हरदोई की तरफ से आ रही यूरिया लदी ट्रैक्टर-ट्राली का टायर फट गया। अनियंत्रित ट्राली दूसरी तरफ से आ रहे डॉक्टर शिशिर को बाइक समेत चपेट में लेकर सड़क किनारे खाई में जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने डा. शिशिर को पहचान लिया। जब तक परिजन और पुलिस मौके पर पहुंची, डा. शिशिर की सांसें थम गईं थीं। प्रभारी निरीक्षक वीके शर्मा की मौजूदगी में शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर डा. सीपी कटियार, डा. अजय सिंह, डा. जितेंद्र कुमार, डा. अंकित द्विवेदी, डा. अमित शर्मा समेत शहर के गणमान्य लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। शव को पैतृक ग्राम सहजनपुर ले जाया गया। शाम को फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर डा. शिशिर का अंतिम संस्कार किया गया।
पत्नी ने नाश्ता तैयार किया, मिली हादसे की सूचना
डा. शिशिर मिश्रा के पिता डा. अरुण मिश्र भी पाली क्षेत्र के प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं। वह पाली में ही क्लीनिक चलाते हैं। डा. शिशिर मंगलवार रात को ही अपने गांव गए थे। रात में मां शशी से उन्होंने कहा था कि बुधवार सुबह जल्दी उठा दें। शिशिर को करीबी सुनील के दसवां संस्कार में शामिल होने लखनऊ जाना था। घर से मां और पिता से यह कहकर निकले थे कि हरदोई में घर पर नाश्ता करके निकलेंगे। इसके बाद उन्होंने पत्नी शिप्रा उर्फ गुड़िया से मोबाइल पर कहा था कि नाश्ता तैयार कर लें, लखनऊ जाना है। इस पर शिप्रा ने नाश्ता तैयार कर लिया। सुबह आठ बजे उसे पति की मौत होने की सूचना दी गई। शिशिर तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनका बड़े भाई हेमंत उर्फ अतुल और छोटे भाई प्रशांत उर्फ विपुल दिल्ली में रहते हैं। एक भाई इंजीनियर है तो दूसरा लेक्चरर।
बेटी के होने पर कहा था, परिवार हो गया पूरा
डा. शिशिर के परिवार में पत्नी शिप्रा, पांच वर्ष का पुत्र मानस और दो माह की पुत्री है। जब बिटिया का जन्म हुआ था तो शिशिर ने परिचितों के साथ मिलकर जमकर खुशियां मनाईं थीं। उन्हाेंने अपना परिवार अब पूरा होने की बात कही थी।
पिता ने दिया अर्थी को कंधा, तो रो पड़ा हर कोई
डॉक्टर शिशिर की मौत की जानकारी से पाली और आसपास के इलाकों में भी शोक छा गया। शिशिर के बुजुर्ग पिता डा. अरुण ने जब उसकी अर्थी को कंधा दिया तो सभी की आंखें नम हो गईं।