ट्रैक पर पत्थर मिलने के बाद बढ़ाई चौकसी
- शातिरों की संख्या थी एक से ज्यादा, मंसूबे खतरनाक
- आरपीएफ ने ग्रामीणों और चरवाहों को किया जागरूक
- अधिकारियों ने कहा, 15 फुट दूर से अकेले पत्थर लाना संभव नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
हरदोई।
डाउन ट्रैक पर बघौली में नहर के पास ट्रैक पर पत्थर मिलने की घटना को अफसरों ने गंभीरता से लिया है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद ट्रैक की चौकसी बढ़ा दी है। अफसरों का कहना है कि पत्थर रखने वाले के इरादे खतरनाक थे। पत्थर काफी दूर से उठाकर लाया गया। ये काम अकेले व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। आरपीएफ ने ट्रैक किनारे रहने वाले ग्रामीणों और चरवाहों को जागरूक करना शुरू कर दिया है।
बुधवार शाम बघौली क्षेत्र में नहर के पास रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखा था। गनीमत रही कि मालगाड़ी के ड्राइवर ने इसे देख लिया और हादसा टल गया था। अफसरों का मानना है कि ये ट्रेन पलटाने की सोची समझी साजिश थी। अफसरों का तर्क है कि घटना में एक से अधिक आदमी शामिल थे। पत्थर का वजन 70 से 80 किलोग्राम रहा होगा। इसे अकेले उठाना संभव नहीं है। जांच के दौरान ये स्पष्ट हुआ कि पत्थर ट्रैक से 15 फिट दूर नीचे की ओर से पुलिया के पास पड़ा था। एक से अधिक आदमी न सिर्फ वहां से पत्थर उठाकर लाए बल्कि उसे बेड़ा बेड़ा ट्रैक पर रख दिया। जिससे रफ्तार में आने वाली ट्रेन पर इसका असर पड़े। घटना के बाद रेल पथ विभाग ने ट्रैक की चौकसी बढ़ा दी गई है। अफ सर संबंधित क्षेत्र के आस पास लगातार नजर बनाए हैं। आरपीएफ कमांडेंट बचे सिंह ने बताया कि ग्रामीणों और चरवाहों को समझाया जा रहा है कि अगर ट्रैक या उसके आस पास कुछ भी संदिग्ध दिखे तो तुरंत आरपीएफ या अधिकारियों को सूचना दें।
ये है ट्रैक की देखरेख और मरम्मत का सिस्टम
हरदोई। एईएन प्रथम के कार्यक्षेत्र में कौढ़ा से लेेकर दलेल नगर तक का रेल मार्ग आता है। करीब 54 किलोमीटर लंबे रेल पथ की मरम्मत और देखरेख के जिम्मा आठ-आठ किलोमीटर के सात सेक्शन में बांटा गया है। नियमत: एक सेक्शन यूनिट में एक मेट के साथ ट्रैक की देखरेख और मरम्मत के लिए 20 गैंगमैन का स्टाफ होना चाहिए। लेकिन स्टाफ की कमी के चलते हर सेक्शन यूनिट में 1 मेट के साथ औसतन 14 लोगों का स्टाप तैनात है। रेल पथ विभाग के अधिकारियों के अनुसार हर सेक्शन यूनिट को दो हिस्सों में बांटा गया है। जो सुबह और शाम अलग-अलग शिफ्ट में ट्रैक की देखरेख का काम स्ंाभालती हैं। बताया कि एक टीम सुबह 5 से शाम चार बजे तक अपने सेक्शन के पूरे ट्रैक की जांच और जरूरत के हिसाब से मरम्मत करती है। वहीं दूसरी टीम रात 11 से सुबह पांच बजे तक गश्त करती है।