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दस मिनट का ब्लैक आउट : ताकि दुश्मन जान ही न पाए निशाना कहां लगाना

Wed, 07 May 2025 11:44 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
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ब्लैकआउट के बाद शहर के सिनेमा रोड चौराहे का हाल। पुलिस विभाग - फोटो : इलाज से इनकार करने पर जिला अस्पताल गेट के बाहर बच्चे के साथ सड़क पर लेटी मां रामकली। संवाद
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नोट : यह फोटो साढ़े दस बजे तक आ पाएगी (दो कॉलम की जगह छोड़ दें)
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- 9:55 बजे पर बजा सायरन, 10:10 तक रहा ब्लैक आउट
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। आपात स्थिति से निपटने के लिए बुधवार रात दस मिनट के लिए ब्लैक आउट किया गया। रात के 9:55 बजे सायरन बजते ही बिजली गुल हो गई। इस दौरान पूरे शहर में अंधेरा छा गया। ज्यादातर शहर वासियों ने भी प्रशासन और पुलिस की अपील पर ब्लैक आउट में सहयोग किया।
वर्ष 1971 में हुए युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब ब्लैक आउट का अभ्यास किया गया। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने देर शाम बैठक कर ब्लैक आउट किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद सभी को ब्लैक आउट के बारे में विस्तार से बताया गया। सीओ सिटी अंकित मिश्रा के मुताबिक हवाई हमले के दौरान सुरक्षा के लिए ब्लैक आउट किया जाता है।
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इसका उद्देश्य यह होता है कि हमले के दौरान हवाई जहाज आबादी वाले इलाकों काे चिह्नित करते हैं। फाइटर प्लेन टारगेट करने के लिए रोशनी का ही सहारा लेते हैं। जहां अंधेरा नजर आता है वहां आबादी की संभावना न होने के कारण फाइटर प्लेन निशाना नहीं साधते हैं।
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अंधेरा होने पर हवाई जहाज से यह पता नहीं चल पाता कि नीचे आबादी है या फिर खाली इलाका। दस मिनट के ब्लैक आउट पर किए गए सवाल पर उन्होंने बताया कि अमूमन फाइटर प्लेन दो से तीन मिनट में पूरा शहर पार कर जाते हैं। हवाई हमले की जानकारी भी दो से चार मिनट पहले ही हो पाती है। ब्लैक आउट होने के कारण दुश्मन टारगेट चिह्नित नहीं कर पाते।

ब्लैकआउट के बाद शहर के सिनेमा रोड चौराहे का हाल। पुलिस विभाग- फोटो : इलाज से इनकार करने पर जिला अस्पताल गेट के बाहर बच्चे के साथ सड़क पर लेटी मां रामकली। संवाद

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