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Hardoi News: वेबसाइट और गेमिंग एप से ठगी करने वाले बीटेक के तीन छात्रों समेत 10 गिरफ्तार

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- वर्ष 2025 में दर्ज हुए मामले की विवेचना में कड़ी से कड़ी जोड़ शातिरों तक पहुंची पुलिस
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- 68 सिम कार्ड, चार टैबलेट, दो लैपटॉप भी बरामद, न्यायालय ने भेजा जेल
संवाद न्यूज एजेंसी

हरदोई। वेबसाइट और गेमिंग एप के जरिए पिछले दो साल से ठगी का कारोबार चला रहे बीटेक के तीन छात्रों समेत 10 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में से छह बहराइच के रहने वाले हैं। दो आरोपी सीतापुर के, एक सिद्धार्थ नगर का और एक छत्तीसगढ़ का निवासी है। इनके कब्जे से चार लैपटॉप, दो टैबलेट, 68 सिम भी बरामद हुए हैं। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। यहां से इन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस ने कई करोड़ रुपये की ठगी किए जाने की आशंका जताई है।
बघौली थाना क्षेत्र के एक गांव में नेपाल निवासी शख्स चौकीदारी करता था। वर्ष 2025 में उसे 40 हजार रुपये घर भेजने थे। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन होने के कारण वह ऑनलाइन रुपये भेजने के विकल्प इंटरनेट पर खोज रहा था। इसी दौरान उसके मोबाइल पर एक कॉल आई और उसने यूपीआई नंबर देकर 40 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद भी रुपये घर नहीं पहुंचे तो चौकीदार ने प्राथमिकी दर्ज करा दी।
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साइबर थाने में दर्ज मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने वह खाता संख्या तलाश ली जिसमें 40 हजार रुपये भेजे गए थे। इसके बाद कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने सोमवार को 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुबोध गौतम ने बताया कि बहराइच जनपद के रानीपुर थाना क्षेत्र के लालापुरवा निवासी जदुवीर सिंह उर्फ जस्सी सिंह, गाजीपुर निवासी रामधीरज सिंह और शुभम गुप्ता उर्फ रजनीश, रामगांव थाना क्षेत्र के फतेहपुरवा निवासी लवकुश सिंह, कोंडी थाना क्षेत्र के रानीबाग निवासी आयुष सिंह, हुजूरपुर थाना क्षेत्र के शिवनहा निवासी लवकुश गुप्ता, सीतापुर के महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र के महमूदपुर निवासी अर्जुन कुमार रावत और समरदहा निवासी हर्षित सिंह, सिद्धार्थ नगर के नौगढ़ थाना क्षेत्र के नगवा निवासी अंशुमान पांडेय (तीनों बीटेक छात्र) और छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी गगन साहू को गिरफ्तार किया गया है।
यह लोग गेमिंग एप और वेबसाइट के जरिए ठगी करते थे। अब तक की पूछताछ में पता चला है कि दो साल से यह लोग घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इनके पास से चार लैपटॉप, दो टैबलेट, 68 सिम कोर्ड, छह एटीएम कार्ड, चार पासबुक, आधार कार्ड व बड़ी संख्या में अभिलेख मिले हैं। सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। यहां से इन्हें जेल भेज दिया गया। आरोपियों में अंशुमान और अर्जुन लखनऊ के देवा रोड स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।

इनसेट
तीन टीम बनाकर दिया जाता था घटनाओं को अंजाम, अभी दो टीमों को पकड़ना चुनौती
साइबर थाने की टीम ने मामले की विवेचना के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम किया और एक बड़े गिरोह का खुलासा करने में सफलता पाई। सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि पूरा गिरोह तीन टीम बनाकर काम करता है। पहली टीम खाता खुलवाने के लिए लोगों को तलाशती है। यही टीम खाता खुलवाने वालों के नाम पर सिम कार्ड और मोबाइल की व्यवस्था करती है। दूसरी टीम की जिम्मेदारी यूपीआई और क्यूआर कोड जनरेट करती है। यही टीम लोगों से बातचीत कर उन्हें निशाना बनाती है। तीसरी टीम ठगी के रुपयों का बैंक खातों से निकालकर दूसरे खातों में भेजने का काम करती है। पुलिस को फिलहाल दूसरी टीम के सदस्य गिरफ्तार करने में कामयाब मिली है। पहली टीम का एक सदस्य भी पुलिस के हत्थे चढ़ा है। हालांकि सीओ सिटी का कहना है कि अभी इस गिरोह के और सदस्यों की तलाश की जा रही है।

इनसेट
पांच हजार रुपये के लालच में खुल जाते बैंक में खाते, मिला जाता सिम
पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। आरोपी ग्रामीण इलाकों के लोगों को ही बैंक खाता खुलवाने से लेकर सिम निकलवाने तक में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा नेट पर सरफिंग करने वाले लो प्रोफाइल युवाओं को भी यह लोग अपने कारोबार में हिस्सेदार सा बना लेते हैं। पांच हजार रुपये में लोगों के अभिलेख लेकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवा देते हैं। उनके ही आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सिम भी ले लेते हैं। पांच हजार रुपये हर ट्रांजक्शन पर भी दिलाने का भरोसा दिया जाता है। हालांकि अभी इस बात की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन आरोपियों ने पुलिस को यही जानकारी दी है।
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इनसेट
जीतने पर रुपये देने में काम आ रहा था ठगी का बजट
आरोपियों ने ऑनलाइन बेबसाइट कबूक, स्पोर्ट 99.वीआईपी, रोलेक्स पैनल.बिन और लोटस 365.बुक.कॉम आदि बनना रखी थी। इन्हीं के जरिए गेमिंग एप्प भी संचालित होते थे। अमूमन लोग गेमिंग एप्प में पैसा लगाकर हार जाते हैं, लेकिन कई बार लोग जीतते भी हैं। जीतने पर उन्हें रुपये देने के लिए ठगी के बजट का इस्तेमाल होता था। दरअसल पूरे गिरोह में काम करने वाली तीसरी टीम फ्रॉड के लिए खोले गए खातों में आने वाले बजट को गेमिंग एप्प के ही बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
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