जिले में दम तोड़ता हथकरघा उद्योग अब फिर से अपनी छाप देशभर में छोड़ेगा। बुनकरों का हुनर हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग निदेशालय उत्तर प्रदेश की विभागीय वेबसाइट ई-तानाबाना पर चमकेगा। बुनकरों द्वारा तैयार उत्पाद भी वेबसाइट पर देखे जा सकेंगे।
पोर्टल के माध्यम से ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी भी कर सकेंगे। जिले में इन दिनों करीब छोटे मोटे 40 हथकरघा और पावरलूम कारखाने संचालित हैं। हाथों से चलने वाले कारखानों की संख्या महज 15 ही रह गई है।
एक दशक पूर्व जिले में हथकरघा कारोबार खूब फल फूलता था। यहां तैयार दरी, शॉल आदि वस्त्र की देशभर में डिमांड थी। लेकिन पावरलूम कारखाने लगने से हथकरघा उद्योग दम तोड़ने लगा है। हथकरघा उद्योगों में तैयार होने वाले वस्त्र महंगे होते हैं,
इसलिए ग्राहक बाजार में जानकारी का अभाव होने का कारण पावरलूम कारखानों में बने वस्त्रों को अधिक प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है इन दिनों हथकरघा उद्योग बंद होने के कगार पर है।
इसी समस्या से उभरने के लिए हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग निदेशालय उत्तर प्रदेश की विभागीय ई-तानाबाना वेबसाइट लागू हो चुकी है। इस वेबसाइट पर वस्त्रों की फोटो व पूरी जानकारी अपलोड की जाएगी। ग्राहक घर बैठे वेबसाइट पर मन चाहे वस्त्र पसंद कर सकेंगे।
विभाग की साइट e-tanabanaup.in पर साड़ी, लहंगा, दुपट्टा, स्टॉल, स्कार्फ, बेडशीट, बेड कवर, तौलिये, दरी आदि की ऑनलाइन खरीदारी की जा सकेगी।
विभाग की वेबसाइट पर जानकारी अपलोड होनी शुरू हो गई है। जल्द ही बुनकरों को अपडेट कर दिया जाएगा। ग्राहक जल्द ही हापुड़ के हथकरघा उद्योगों में बना कपड़ा ऑनलाइन खरीद सकेंगे। नीरज सिंधू, वस्त्र निरीक्षक