हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर में गंगा मंदिर के पास हरकी पैड़ी-सा दृश्य साकार होने की उम्मीद एक बार फिर जाग उठी है। वजह है दीपक सिंघल का प्रदेश का मुख्य सचिव बनना, क्योंकि एक दशक पहले मेरठ के मंडलायुक्त रहे दीपक सिंघल का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। उनके स्थानांतरण के बाद यह अधर में लटक गया था।
अब गंगा मंदिर के पैड़ियों के पास से कल-कल कर धारा बहाने की योजना पर अमल हो सकता है। इस संबंध में यहां के सपा नेताओं का कहना है कि वह मुख्य सचिव से इस संबंध में वार्ता करेंगे। गंगा मंदिर गढ़मुक्तेश्वर का प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर में लगभग सौ पैड़ियां हैं।
लोगों की माने तो किसी समय गंगा नदी मंदिर की पैड़ियों को छूकर बहती थी। गंगा रूठी तो धीरे-धीरे घाटों से बहुत दूर हो गई। अब तो मंदिर से कोसों दूर बहती हैं। तकरीबन एक दशक पहले दीपक सिंघल मेरठ के मंडलायुक्त थे।
तब उन्होंने गंगा मैय्या की धार एक नहर के रूप में गंगा मंदिर तक लाने तथा उसे आगे बढ़ाकर ब्रजघाट से पहले गंगा नदी में मिलाने का प्रोजेक्ट बनाया था। इसमें सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट का मानचित्र भी तैयार करा लिया था।
लेकिन दीपक सिंघल का तबादला होने के बाद यह प्रोजेक्ट अधर में लटक गया। अब दीपक सिंघल प्रदेश के मुख्य सचिव बने हैं। ऐसे में यहां के लोगों में उम्मीद जागी है कि वह अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को शासन से स्वीकृति दिला सकेंगे।
वहीं, इस बाबत सपा के जिलाध्यक्ष किशन सिंह तोमर और सपा के जिला प्रवक्ता पं. राजेश शर्मा ने कहा है कि जनहित के इस प्रोजेक्ट को शुरू कराने के लिए वह प्रदेश सरकार की ओर से हर संभव सहयोग कराएंगे।