सरकार की गेहूं क्रय योजना जिले में फ्लाप-सी होती दिख रही है। पहली अप्रैल से 15 जून तक 15000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। दो महीने बीत चुके हैं और पखवारे भर का समय ही शेष बचा है।
अभी तक मात्र 3000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है। ऐसे में यह सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है कि लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। जिले के 28 क्रय केंद्रों के जरिए पहली अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई।
पीसीएफ के बीस, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, यूपी एग्रो का एक, एफसीआई का एक, हॉट शाखा के चार क्रय केंद्र खोले गए हैं। किसानों को लुभाने के लिए क्रय केंद्रों को हर सुविधा से लैस करने का दावा भी किया गया था।
अफसरों की माने को क्रय केंद्रों पर किसानों के बैठने, पशुओं के पानी, खरीद के लिए पर्याप्त बारदाना आदि की व्यवस्था हर समय रही। इसके बाद भी क्रय केंद्रों तक किसान नहीं पहुंचे। समर्थन मूल्य 1525 रुपये कुंटल के मुकाबले बाजार में गेहूं की खरीद महंगी होने से अफसरों की क्रय केंद्र पर खरीद बढ़ाने की रणनीति फ्लाप रही।
मालूम हो कि इस बार जिले में गेहूं की 41 हजार हेक्टेयर फसल की बुआई हुई है। इसके बाद भी क्रय केंद्रों पर गेहूं का टोटा-सा रहा। जिले को गेहूं खरीद का 15 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य मिला था। लेकिन दो माह बाद भी लक्ष्य पूरा तो दूर आधा भी नहीं हो पाया।
अब तक मात्र 3000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। इसका कारण किसानों ने अपना अधिक गेहूं मंडियों में व्यापारियों को बेचा है क्योंकि खुले बाजार में गेहूं 1600 रुपये कुंटल तक बिक रहा है।
सबसे अधिक गेहूं की खरीद पीसीएफ के गोदाम पर 1500 कुंटल, मार्केटिंग के केंद्रों पर 1100 कुंटल, जबकि शेष गेहूं की खरीद एफसीआई, यूपी एग्रो और कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्रों पर हुई है।
वहीं, जिले के किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों पर परेशान करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। गेहूं के दाने को पतला बताकर लौटाना आम बात है। भुगतान की समस्या खड़ी हो जाती है। साथ ही बाजार के मुकाबले समर्थन मूल्य भी कम है।
ऐसे में उनका सरकारी क्रय केंद्रों से मोह भंग होता जा रहा है। उधर, इस बाबत जिला विणपन अधिकारी बीसी गौतम का कहना है कि बाजार में किसानों ने अपना गेहूं अधिक बेचा है। इसलिए केंद्रों पर गेहूं की खरीद कम हुई है। अच्छी गुणवत्ता के गेहूं का दाम भी किसान को बाजार में अधिक मिला है।