शासन के निर्देश पर जिले में मंगलवार को कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। इस दौरान स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों पर 2.50 लाख बच्चों को एंटी कृमि दवाएं खिलाई गई। छूटे बच्चों को चार मार्च को दवाई खिलाई जाएगी।
वहीं, गढ़ के बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव पसवाड़ा के देव पब्लिक स्कूल में दवाई खाने के बाद 200 में से 30 बच्चों का हालत बिगड़ गई। स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर बच्चों को सीएचसी में भर्ती कराया।
बच्चों को पेट में कीड़ों की समस्या से राहत दिलाने के लिए शासन ने 28 फरवरी को कृमि मुक्ति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। अभियान को सफल बनाने के लिए 0-19 साल तक के बच्चों को स्कूल, आंगनबाड़ी केद्रों पर दवा खिलाई गई।
इस बार स्कूलों में दवा खिलाने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई थी। अभियान के तहत जिले के 3.74 लाख बच्चों को दवा खिलायी जानी थी। मंगलवार को 2.50 लाख बच्चों को दवा खिला दी गई।
अभियान की मॉनिटरिंग शासन से की गई थी। मुख्य चिकित्साधिकारी ने स्कूलों में औचक निरीक्षण किया। हालांकि सभी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थिति संतोषजनक मिली। सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि मंगलवार को 2.50 लाख बच्चों को दवा खिलाई गई है।
छूटे बच्चों को चार मार्च को स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों पर दवा खिलाई जाएगी। सीडीपीओ प्रेमवती ने बताया कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को कृमि मुक्ति के लिए दवाई खिलाई गई।
साथ ही पिलखुवा में प्राथमिक विद्यालय सिखैड़ा नंबर एक और गढ़ में सिंभावली, ब्रजघाट, बहादुरगढ़ सहित क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में सरकारी, गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं, इंटर कॉलेजों में बच्चों को दवा दी गई।
वहीं, दूसरी ओर बहादुरगढ़ क्षेत्र के पसवाड़ा गांव के देव पब्लिक स्कूल में दवाई खाने के बाद 200 बच्चों में 30 बच्चों की हालत बिगड़ गई। बच्चों को पेट दर्द के साथ ही उल्टियां होने लगीं। बच्चों की हालत बिगड़ने पर हड़कंप मच गया।
स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में एंबुलेंस से बच्चों को सीएचसी गढ़ में भर्ती कराया। खबर मिलते ही पुलिस-प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। तहसीलदार मनोज कुमार सिंह और सीओ सतीश चंद्र पांडेय सीएचसी पहुंचकर बच्चों का हालचाल लिया।
चिकित्सकों ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद हालत में सुधार होने पर रोहित, प्राची चौहान, साधना शर्मा, अंशिका चौहान, महक चौहान, परी चौहान, सुहेल, जुनैद, वनहर, अजय, नाजिया, अनम, कशिश, अभिया समेत सभी 30 बच्चों को दो घंटे बाद छुट्टी देकर घर भेज दिया गया।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में खिलाई गई एलबेंडाजॉल टेबलेट से बच्चों की हालत बिगड़ने और उन्हें सीएचसी गढ़ को भेजे जाने की खबर मिलते ही उनके परिवारों में हड़कंप मच गया।
अनहोनी की आशंका से भयभीत परिजन रोते बिलखते हुए स्कूल में पहुंचे और उसके बाद सीएचसी आए। सभी बच्चों की हालत खतरे से बाहर होने का पता लगने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
सीएचसी के अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को समूचे देश में लाखों स्कूलों बच्चों को पेट के कीड़े मारने वाली दवा खिलाई गई है।
जिससे कुछ बच्चों में जी मिचलाना, घबराहट होना, उल्टी लगना और पेट में तेज दर्द होने जैसी शिकायत हो जाती है। इससे किसी भी स्तर पर कोई अनहोनी नहीं होती है।
कृमि दिवस के अवसर पर स्कूलों में दवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी डीआईओएस व बीएसए को सौंपी गई थी। लेकिन नगर के कई स्कूलों में बच्चों को दवा ही नहीं मिल सकी। हालांकि, सीएमओ का कहना है कि छूटे बच्चों को चिन्हित कर चार मार्च को उन्हें दवा खिलाई जाएगी।