संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रजघाट। तपिश भरी गर्मी के कारण गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहने से निचले जंगल में उग रही मौसमी फल सब्जी की सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद होने से खादर क्षेत्र में किसानों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
तपिश भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप निकलने से उत्तराखंड के पहाड़ों में बड़ी तेजी के साथ ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इससे पहाड़ों से होकर आ रही गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला तीन दिनों से निरंतर जारी है। गंगा के रेतीले टापू और किनारे वाले जंगल में उग रही खीरा, ककड़ी, लोकी, सीताफल, खरबूजा, तरबूज, टमाटर, करेला, भिंडी, तोरी समेत विभिन्न प्रकार की मौसमी फल सब्जी की सैकड़ों बीघा फसलें बर्बादी हो चुकी हैं। इसके अलावा निचले जंगल में पानी भरने का सिलसिला जारी रहने से किसानों में बेचैनी बढ़ती जा रही है।
लोगों को गन्ने के साथ ही हरे चारे की फसल बर्बादी होने का डर सता रहा है। जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के कारण गंगा के किनारे भू-कटान भी शुरू हो गया है, जिससे किसानों को अपनी बेशकीमती भूमि गंगा की गोद में समाने का डर भी सता रहा है। रविवार की देर शाम से लेकर सोमवार की देर शाम तक 10 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी होने से गढ़ ब्रजघाट गंगा का जलस्तर समुद्र तल से 196.90 मीटर पर पहुंच गया है।
एसडीएम अंकित कुमार वर्मा ने बताया कि गर्मी के मौसम में ग्लेशियर पिघलने के दौरान गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होना एक प्राकृतिक क्रिया है। हल्का लेखपाल और राजस्व टीम के माध्यम से स्थिति पर नजर रखवाई जा रही है।