जसरूपनगर गांव में धीरखेड़ा औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी भरने और प्रशासन की अनदेखी पर लोगों का आक्रोश फूटने लगा है। बुधवार को ग्राम प्रधान पति और ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर एक सप्ताह में राहत नहीं
मिलने पर स्वयं की नाले को रोकने और आंदोलन की चेतावनी दी है। साथ ही लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से गांव में कैंप लगवाने की मांग की है। उल्लेखनीय है मोदीनगर रोड स्थित जसरूपनगर गांव के बाह्य छोर पर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला दूषित पानी भरा है।
गांव में अनेक प्रकार के रोग लोगों को सता रहे हैं। हैंडपंपों से दूषित पानी निकलने से लोग भयभीत हैं। काफी शिकायतों के बावजूद भी प्रशासन गंभीर नहीं हो रहा है। बुधवार को प्रशासन की अनदेखी पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्राम प्रधान पति विरेंद्र कुमार और ग्रामीण बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचे।
उन्होंने प्रधान की ओर से अफसरों से गंभीरता बरतने की बात कही। इतना ही नहीं एक सप्ताह के अंदर राहत नहीं मिलने पर खुद ही धीरखेड़ा से कालोनी तक आ रहे नाले को बंद करने व आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है। वहीं, प्रधान पति ने कालोनी में शराब का ठेका नहीं खुलने देने की भी चेतावनी दी है।
एसडीएम मीनू राणा ने बताया कि लेखपाल को भेजकर जांच रिपोर्ट तैयार करा ली गई है। जल निगम और ब्लॉक की टीम को भी पत्र भेजकर जल निकासी के संबंध में निर्देशित किया गया है। वह भी मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगी।
बुधवार को ग्रामीण इलाज के लिए आयुष विंग नहीं पहुंचे। उनका कहना था कि लोग चलने में असमर्थ हैं। स्वास्थ्य अफसर कालोनी में ही कैंप की व्यवस्था कराएं, ताकि लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
वहीं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि बुधवार को आयुष विंग पर शिविर लगाया गया था। मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था की गई थी। लोग कालोनी में शिविर लगाने की बात कह रहे हैं। लोगों को समस्या न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।